
Dholpur, राजाखेड़ा. स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च के बाद भी सरकारी सिस्टम के कारण स्थिति बदहाल है। जहां बजट को लालायित रहने वाले अधिकारी बस चेम्बर्स में बैठकर बिना किसी ठोस योजना के इसे ठिकाने लगाने से ज्यादा कुछ भी नहीं कर रहे। यही कारण है कि आज भी खुले में शौच पर प्रतिबंध नहीं लग सका और जिम्मेदार आंखों पर पट्टी बांधकर स्वच्छ भारत अभियान का पलीता लगा रहे हैं।
नगर पालिका क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच जा रहे हैं, जबकी हर घर को शौचालय सरकार के अनुदान से बनवा दिए गए हैं। बड़ी संख्या में सार्वजनिक शौचालय भी बना दिए गए हैं, उसके बाद भी अलसुबह से खेतों की ओर शौच के लिए जाते दिखना व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर रहा है साथ ही अब तक खर्च किए गए बजट पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उसका परिणाम आखिर क्यों प्राप्त नहीं हो रहा?
बजट ठिकाने लगाने को बनाए शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर भारी बजट सरकार पालिकाओं को देती है, लेकिन पालिका के अधिकारी, ठेकेदार जनप्रतिनिधियों पर इस बजट को सिर्फ ठिकाने लगाने का उद्देश्य रखने का आरोप हमेशा लगता रहा है। बिना किसी ठोस योजना अनुपयोगी स्थानों पर इन्हें बनाया गया वह भी बेहद घटिया। जिनमें पानी की टंकी और पानी की उपलब्धता तक की व्यव्यस्था नहीं की गई। ढांचा खड़ा किया और फोटो लेकर उपयोगिता प्रमाण पत्र लिया और बजट गायब। सबसे बड़ी बात यह है कि पालिका में अभियंताओं की तैनाती के बाद भी ये घटिया निर्माण स्वीकृत कैसे हो गए और अप्रयुक्त रहने पर इनकी जांच और जवाबदेही तय क्यों नहीं कि गई। क्यों ऐसे अभियंताओं को खुली छूट दी गई। क्षेत्र में अब तक जितने शोचालय बनाए गए हैं वे सभी या तो अनुप्रयुक्त ही जर्जर हो चुके हैं या ताला बंद पड़े हुए हैं। चिंताजनक बात यह है कि इनकी निर्माण गुणवत्ता और ढांचे को देखकर प्रथमदृष्टया साबित होता है कि इनका निर्माण आखिर हुआ कैसे होगा?
नहीं रहते जिम्मेदार मुख्यालय पर
इस सबको रोकने के लिए अधिकारियों को चेम्बर्स से बाहर निकलकर फील्ड में भ्रमण की आवश्यकता होती है, लेकिन पालिका के अधिकारियों को आमजन ने कभी भी जमीनी जानकारी लेने के लिए सडक़ों पर नहीं देखा। जिम्मेदार अधिकारी मुख्यालय पर निवास भी नहीं करते और आगरा धौलपुर से कार्यालय समय पर भी नहीं आ पाते ऐसे में अधीनस्थ कर्मचारी भी बेखोफ रहते हैं और वे भी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पा रहे, लेकिन अब तक जिला प्रशासन ने भी यहां के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की न जांच की न ही मुख्यालय पर रहने के लिए पाबंद ही किया है। जिसके चलते राजाखेड़ा अव्यवस्थाओं का केन्द्र बन चुका है।
दो दर्जन से अधिक ईंट भट्टों पर नहीं शौचालय
नगर पालिका क्षेत्र के आबादी क्षेत्र में ही दो दर्जन से अधिक ईंट भ_े अवैध व वैध रूप से संचालित हैं। प्रत्येक भट्टे पर औसतन 50 परिवार बिहार व उत्तरप्रदेश से मजदूरी करने आते हैं, ऐसे में लगभग एक हजार प्रवासी परिवार भी खुले में शौच जा रहे हैं, लेकिन पालिका के अधिकारियों ने कभी भी मौके पर जाकर हालात नहीं जांचे। न ही भट्टा मालिकों को भट्टों पर सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए ही पाबंद किया। न ही आबादी क्षेत्र में धुआं उगल रहे भट्टों पर कार्रवाई का ही प्रयास किया, जबकि इनमें आधे तो बिना किसी औद्योगिक मंजूरी के ही क्षेत्र की आबोहवा को जहरीला बना रहे हैं ।