धौलपुर

Dholpur: चंबल की नहीं अब पार्वती से आएगी बजरी, स्थान किए चिह्नित

जिला प्रशासन ने अब जिले में बजरी की मांग पूर्ति के लिए पार्वती नदी क्षेत्र में पट्टा देने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। खनिज विभाग ने जिले के सैंपऊ उपखंड में नदी क्षेत्र में बजरी निकलने वाले स्थानों को चिह्नितकरण कर लिया और अब राजस्व विभाग के साथ सर्वे किया जाना है।
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पार्वती नदी

धौलपुर. पूर्वी राजस्थान के धौलपुर जिले के एक बड़े भू-भाग को मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश अगर कोई सीमा में विभाजित कर रहा है तो केवल चंबल नदी ही है। अभी तक चंबल नदी से बड़े स्तर पर अवैध बजरी उत्खनन और जलीय जीवों को पहुंच रहे नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद जिले में बीते करीब तीन माह (गत 17 अप्रेल से) से चंबल बजरी निकासी और परिवहन ठप पड़ा है।

एमपी के मुरैना और फिर धौलपुर जिले में चंबल से अवैध बजरी रोकने के प्रशासन की ओर से किए इंतजामों को जांचने के बाद सीईसी चेयरमैन चंद्रप्रकाश गोयल ने स्पष्ट कहा कि चंबल नदी क्षेत्र बजरी निकासी पहले से ही प्रतिबंधित थी, अब केवल पूर्व आदेशों की पालना कराई जा रही है। इधर, चंबल बजरी के हाल-फिलहाल घाटों से बाहर नहीं आने के चलते जिला प्रशासन ने अब जिले में बजरी की मांग पूर्ति के लिए पार्वती नदी क्षेत्र में पट्टा देने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। खनिज विभाग ने जिले के सैंपऊ उपखंड में नदी क्षेत्र में बजरी निकलने वाले स्थानों को चिह्नितकरण कर लिया और अब राजस्व विभाग के साथ सर्वे किया जाना है। सूत्रों के अनुसार पार्वती नदी क्षेत्र में आगामी दो माह में बजरी के पट़्टे जारी किए जा सकते हैं।

शुरुआत में 3 से 4 पट्टे जारी होंगे

खनिज विभाग के अनुसार पार्वती नदी क्षेत्र में शुरुआत में बजरी खनन के लिए करीब 3 से 4 पट्टे जारी किए जाएंगे। उक्त पट्टे 25 से 40 हेक्टेयर के बीच होंगे। यानी छोटे पट्टे होंगे, जिससे स्थानीय लोग भी इसमें भागीदारी निभा सकें। एमई ने बताया कि कुछ स्थान चिह्नित किए हैं जहां पर अभी केवल 3 से 4 ही प्लाट बनेंगे। बताया कि जल्द रिपोर्ट बनाकर उदयपुर कार्यालय भेजी जाएगी, जहां से खुली बोली जरिए ऑक्शन होगा।

पहले दो लीज दी पर फर्म ने नहीं दिखाई रुचि

पार्वती नदी क्षेत्र में खनिज विभाग पहले भी एक बड़ी फर्म को साल 2024 में दो लीज जारी की थी। लेकिन उक्त फर्म ने पार्वती क्षेत्र से बजरी निकासी को लेकर खास रुचि नहीं दिखाई। सूत्रों के अनुसार बजरी क्वालिटी अच्छी नहीं होने से फर्म ने यहां खास निवेश नहीं किया और न ही मशीनें इत्यादि लगाई। उक्त फर्म पर ही राजस्थान में टोंक जिले में बनास समेत अन्य स्थानों पर भी खनिज की लीज थी। बाद में उक्त दोनों लीजों को विभाग ने खंडित कर दिया था।

लाल बजरी और चिनाई में पकड़ नहीं...

चंबल बजरी अपनी मजबूती के लिए प्रसिद्ध है। जबकि पार्वती नदी क्षेत्र से निकलने वाली बजरी हल्के लाल की होती है और यह अधिक महीन होती है। साथ भवन निर्माण कार्य और प्लास्टर में इसकी पकड़ चंबल के मुकाबले की नहीं है। जिस वजह से धौलपुर जिले में पार्वती बजरी को लोग पसंद नहीं करते हैं। उक्त नदी मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से धौलपुर में प्रवेश करते हुए फिर यूपी के आगरा जिले की ओर निकलती है। यह बारिश पर ही निर्भर है। बीते दो साल से अच्छी बारिश होने पर नदी में खूब पानी आया था जबकि अमूमन यह सूखी पड़ी रहती है।

सुप्रीम पॉवर के सामने अवैध बजरी निकासी बंद...

गौरतलब रहे कि केन्द्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) चेयरमैन चंद्रप्रकाश गोयल एवं सदस्य अंजन मोहंती ने गुरुवार को मुरैना और धौलपुर जिले का दौरा किया था। एमपी के मुरैना जिला स्थित देवरी घडिय़ाल केन्द्र पर एमपी, राजस्थान और यूपी के प्रशासनिक, पुलिस, वन समेत अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ चंबल की अवैध बजरी रोकने के इंतजामों की जानकारी ली। इससे पहले टीम गत अप्रेल में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दौरा कर चुकी थी। उसी समय से चंबल की अवैध बजरी पर नकेल कसना शुरू हो गया था। जिले में अवैध बजरी मामले में अममून हर माह करीब 25 से 28 एफआइआर दर्ज होती थी, जो मई में 4 और जून में 3 और जुलाई में अभी तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

डस्ट का उपयोग, सिंध की रेत महंगी...

उधर, चंबल नदी क्षेत्र से बजरी परिवहन बंद होने के बाद शहर में निजी और सरकारी इमारतों के निर्माण कार्य में डस्ट का उपयोग शुरू हो गया है। जिले में डस्ट एमपी के ग्वालियर से पहुंच रही है। हालांकि, सिंध की रेत भी उपलब्ध है लेकिन यह महंगी होने से कम ही लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर में प्रतिदिन करीब आधा दर्जन डंपर और ट्रोला पहुंच रहे हैं। शहर में पैलेस रोड, सैंपऊ, बाड़ी, ओडेला और राजाखेड़ा बाइपास रोड समेत कई स्थानों पर डस्ट और कुछ पर सिंध की रेत मिल जाएगी। इसमें सिंध चंबल के मुकाबले महंगी होने से लोग इसको फिलहाल लेने से कतरा रहे हैं। जबकि डस्ट का खूब उपयोग हो रहा है। हालांकि, लोग डस्ट को नींव, चारदीवारी इत्यादि निर्माण कार्य में ले रहे हैं। जबकि सरकारी इमारतों में यह जमकर खप रही है। वहीं चंबल बजरी के जो पुराने स्टॉक शहर के आसपास थे, वह अभी नहीं दिख रहे हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्र और चंबल किनारे के गांवों में कुछ स्थानों पर स्टॉक है लेकिन वह पड़ा हुआ है।

- पार्वती नदी क्षेत्र में इस दफा छोटे पट्टे जारी किए जाएंगे। स्थान चिह्नित हो गए हैं, अब पटवारी के साथ सर्वे किया जाना है। जिसके बाद फाइल उदयपुर कार्यालय भेजेंगे, कार्यालय से ही ऑक्शन प्रक्रिया कर पट्टे जारी होंगे। पूर्व में पार्वती में दी लीज खंडित हो चुकी हैं। चंबल नदी से बजरी निकासी पहले से ही प्रतिबंधित थी।

- पुष्पेन्द्र मीणा, खनि अभियंता धौलपुर

Updated on:
20 Jul 2026 07:38 pm
Published on:
20 Jul 2026 07:38 pm