धौलपुर

पुरानी इमारत और एतिहासिक विरासत की गवाही देता दमोह का जंगल

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Updated: 15 Mar 2026, 7:30 PM IST
पुरानी इमारत और एतिहासिक विरासत की गवाही देता दमोह का जंगल The forest of Damoh bears witness to old buildings and historical heritage

जंगल में बने शिकार गृह और ऊंचे मचान और नाले किनारे बनी इमारत आकर्षण का केन्द्र

dholpur, सरमथुरा. धौलपुर करौली टाइगर अभ्यारण्य बाघों का कुनबा बढ़ने से गुलजार है। जहां साइटिंग के दौरान बाघों को देखना एक रोमांचक अनुभव है। वहीं, ये अभ्यारण्य ऐतिहासिक विरासतों और पुरानी वास्तुकला को भी अपने भीतर समेटे हुए हैं, जो बाघों के साथ-साथ विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

राजतंत्र में मन्दिर, तालाब, बावड़ियां आदि बनी हुई तो देखी होंगी, लेकिन धौलपुर करौली टाइगर अभ्यारण्य में दमोह के नाले में बनी ऊँची मचान, पुरानी शिकारी राहें, शिकार खेलने के लिए बनाए गए शिकार गृह आकर्षण का केन्द्र हैं। अभ्यारण्य के कोर एरिया में ये ऐतिहासिक इमारत आज भी देखी जा सकती हैं, जो उन दिनों की शिकार परंपरा की गवाही देती हैं।

घने जंगल में राजा-महाराजा ने शिकार के लिए बनाए गए शिकार गृह को देख वनविभाग के अधिकारी भी आश्चर्य चकित हैं। इस इमारत में सुरक्षा व सुविधा को देख अधिकारी हैरान हैं। धौलपुर करौली टाइगर अभ्यारण्य रेंजर देवेन्द्र सिंह चौहान बताते हैं कि धौलपुर जिले में टाइगर अभ्यारण्य में ऐतिहासिक विरासतों और पुरानी वास्तुकला को भी अपने भीतर समेटे हुए हैं, जो बाघों के साथ-साथ विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जिले में दमोह झरना भी इसी अभ्यारण्य का हिस्सा है। जो बरसात के मौसम में लोगों को आकर्षित करता है। वही घने जंगल में बनी पुरानी इमारतें भी एतिहासिक विरासत की गवाही दे रही है।

-टाइगर के साथ भालू का भी होगा दीदार

चंबल क्षेत्र के कूनो में चीता, चंबल नदी में घड़ियाल और अब धौलपुर करौली टाइगर रिजर्व में बाघ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। चंबल में वन्यजीव और मनुष्य मिलकर सह-अस्तित्व के भाव से अपनी-अपनी जिंदगी जी रहे हैं। यह अद्भुत नजारा केवल चंबल के तटीय इलाकों में देखने को मिलता है। राज्य सरकार के प्रयासों से यहां पर्यटन बढ़ेगा तो रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी और धौलपुर के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे। इस अभ्यारण्य का बनना धौलपुर के समग्र विकास के लिए बढ़ते कदम है।

-एतिहासिक इमारत को निहारते रहे अधिकारी

अभ्यारण्य में बनी इमारत का वन अधिकारियों ने अवलोकन किया। धौलपुर करौली टाइगर अभ्यारण्य डीएफओ आशीष व्यास, डीएफओ वी. चेतन कुमार, प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी प्रतीक्षा नानासाहेब काले व एसीएफ चेतराम मीणा ने टाइगर अभ्यारण्य में टाइगर ट्रेकरों के साथ करीब 10 किमी तक ट्रेकिंग कर जंगल में बनी एतिहासिक विरासतों को निहारा। यही नहीं वन अधिकारियों ने दमोह के नाले में पत्थर व मिट्टी से बनी बीस-बीस फीट ऊंची प्रकृतिक दीवारों को बाघों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से मुफीद मानते हुए संतुष्टि जाहिर की।

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15 Mar 2026, 7:30 PM IST
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