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मजदूर का मेहनताना देने में राजस्थान पीछे…

धौलपुर. तपती दोपहरी में मेहनत कर रहे श्रमिकों को आज भी उनके हिस्से की वाजिब मजदूरी नहीं मिल रही है। हालांकि, राज्य सरकारें श्रमिक सुधार के लिए कई घोषणाएं करती हैं लेकिन जमीनी स्तर पर यह तस्वीर धुंधली नजर आती है। दूसरी ओर महंगाई के दौर में उचित मजदूरी नहीं मिलने पर एक श्रमिक अपने परिवार को दो जून की रोजी-रोटी को लेकर चितिंत रहता है। हाल में उत्तरप्रदेश के नोएडा में श्रमिकों के हुए विरोध-प्रदर्शनों ने एक दफा फिर से देशभर में प्रदेश की सरकारों का ध्यान खींचा है। सवाल एक ही है कि जी-तोड़ मेहनत की उन्हें उचित मजदूरी चाहिए। देशभर में बड़ी संख्या में अकुशल श्रमिक हैं जो अपना घर-परिवार छोड़ कर बड़े महानगरों में पसीना बहा कर परिवार को पाल रहे हैं। वहीं, राजस्थान की बात करें तो यहां दूसरे पड़ोसी राज्यों की तुलना में अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 7 हजार 722 रुपए है जो प्रतिदिन का मात्र 297 रुपए होता है। जबकि उत्तर प्रदेश में 11,313 रुपए, मध्यप्रदेश में 12,425 और हरियाणा में 15 हजार से अधिक महीने का वेतन मिल रहा है। उस लिहाज से प्रदेश में अकुशल श्रमिकों को वेतन कम है। जबकि एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब 900 रुपए हैं और किराये के कमरे में रहना और परिवार के दो समय का भोजन का खर्चा करने के बाद उसके हाथ में कितनी राशि बचती होगी, यह आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं। अगर परिवार को सदस्य बीमार पड़ जाए तो उधारी लेने की नौबत आ जाती है। लेकिन इसके बाद भी मजदूर ज्यादा कुछ कहे भरी दोपहरी में काम में जुट जाता है।

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dholpur news

- प्रदेश में अकुशल श्रमिक को महीने का 7722 रुपए, यूपी में 11 हजार से अधिक

- जिले में जिले में निर्माण क्षेत्र में 81 हजार श्रमिक पंजीकृत, औद्योगिक इकाई का नहीं कोई हिसाब

- विश्व मजदूर दिवस आज

धौलपुर. तपती दोपहरी में मेहनत कर रहे श्रमिकों को आज भी उनके हिस्से की वाजिब मजदूरी नहीं मिल रही है। हालांकि, राज्य सरकारें श्रमिक सुधार के लिए कई घोषणाएं करती हैं लेकिन जमीनी स्तर पर यह तस्वीर धुंधली नजर आती है। दूसरी ओर महंगाई के दौर में उचित मजदूरी नहीं मिलने पर एक श्रमिक अपने परिवार को दो जून की रोजी-रोटी को लेकर चितिंत रहता है। हाल में उत्तरप्रदेश के नोएडा में श्रमिकों के हुए विरोध-प्रदर्शनों ने एक दफा फिर से देशभर में प्रदेश की सरकारों का ध्यान खींचा है। सवाल एक ही है कि जी-तोड़ मेहनत की उन्हें उचित मजदूरी चाहिए। देशभर में बड़ी संख्या में अकुशल श्रमिक हैं जो अपना घर-परिवार छोड़ कर बड़े महानगरों में पसीना बहा कर परिवार को पाल रहे हैं। वहीं, राजस्थान की बात करें तो यहां दूसरे पड़ोसी राज्यों की तुलना में अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 7 हजार 722 रुपए है जो प्रतिदिन का मात्र 297 रुपए होता है। जबकि उत्तर प्रदेश में 11,313 रुपए, मध्यप्रदेश में 12,425 और हरियाणा में 15 हजार से अधिक महीने का वेतन मिल रहा है। उस लिहाज से प्रदेश में अकुशल श्रमिकों को वेतन कम है। जबकि एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब 900 रुपए हैं और किराये के कमरे में रहना और परिवार के दो समय का भोजन का खर्चा करने के बाद उसके हाथ में कितनी राशि बचती होगी, यह आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं। अगर परिवार को सदस्य बीमार पड़ जाए तो उधारी लेने की नौबत आ जाती है। लेकिन इसके बाद भी मजदूर ज्यादा कुछ कहे भरी दोपहरी में काम में जुट जाता है।

जिले में 81 हजार श्रमिक पंजीकृत

धौलपुर जिले में श्रम विभाग से करीब 81 हजार 55 श्रमिक पंजीकृत हैं। इन पंजीकृत श्रमिकों को विभाग की ओर से लेबर कार्ड मिलता है। जिसमें कुछ सुविधाएं हैं। इसमें बच्चों के लिए छात्रवृत्ति के साथ औजार के लिए करीब 2 हजार रुपए पुनर्भरण को मिलते हैं। यह पंजीकृत श्रमिक निर्माण क्षेत्र में हैं। इसमें जिले के औद्योगिक क्षेत्र में यानी फैक्ट्रियों में कार्य कर रहे श्रमिक शामिल नहीं है। न ही श्रम विभाग के पास इसका कोई अधिकृत डेटा है।

रीको में सैकड़ों श्रमिक कार्यरत, खनन क्षेत्र में अब कम

धौलपुर रीको क्षेत्र में वर्तमान में करीब 350 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं। जिसमें करीब 6 हजार से अधिक श्रमिक अलग-अलग इण्डस्ट्रीज में काम कर रहे हैं। इसमें कुछ कुशल, अद्र्ध कुशल और अकुशल श्रमिक शामिल हैं। रीको धौलपुर के एआरएम पिनतेश मीणा ने बताया कि श्रमिकों की संख्या और भी हो सकती है। विभाग के पास सीधे तौर अधिकृत डेटा नहीं है। उन्होंने बताया कि जिले भर में और भी कई इकाइयां संचालित हैं, जिससे श्रमिकों की संख्या अधिक हो सकती है। जिले में वैसे तो मुख्यतय बड़ी इण्डस्ट्रीज के रूप में खनिज इकाइयां हैं। लेकिन धौलपुर-करौली टाइगर सेंचुरी के चलते यह इण्डस्ट्रीज प्रभावित हुई है। इकाइयों के पास माल की कमी होने से श्रमिकों की संख्या में कमी आई है। इसके अलावा दुग्ध उद्योग, पैकिजिंग, मेडिकल इण्डस्ट्रीज समेत अन्य में भी श्रमिक कार्यरत हैं।

पड़ोसी प्रदेशों के श्रम वेतन पर नजर

- यूपी में एक अप्रेल से संशोधित न्यूनतम मजदूरी अकुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन 11 हजार 313 रुपए और दैनिक मजदूरी 433.14 रुपए है।

- एमपी में भी एक अप्रेल से नई न्यूनतम मजदूरी दर के अनुसार मासिक वेतन 12 हजार 425 रुपए हैं। यह बढ़ोतरी महंगाई भत्ते के आधार पर है।

- हरियाणा में एक अप्रेल से अकुशल मजदूरों का मासिक वेतन 15 हजार 220 रुपए किया है जबकि पहले यहां 11257 रुपए था।

राजस्थान में विभिन्न श्रेणियों में श्रमिक वेतन व मजदूरी

श्रमिक श्रेणी न्यून.दैनिक मजदूरी न्यून.मासिक मजदूरी

अकुशल 297 7722अद्र्ध कुशल 309 8034कुशल 321 8346उच्च कुशल 371 9646------

जिले में पंजीकृत श्रमिक 81 हजार से अधिक हैं। इन्हें सरकार की योजनाओं का फायदा मिलता है। निर्माण कार्य में लगे अकुशल श्रमिकों को प्रतिदिन की मजूदरी 297 रुपए हैं। जबकि मासिक वेतन 7722 हैं।

- अरविन्द कुमार दीक्षित, जिला श्रम कल्याण अधिकारी धौलपुर