-बस बजट खपाने और भुगतान करने की कवायद में जुटा अमला -वहीं आमजन पिछले 5 वर्ष के कार्यों की जांच पर एकजुट dholpur, राजाखेड़ा. प्रशासक बने सरपंचों ने विभागीय अधिकारियों के कथित मोन स्वीकृति से पिछले 3 माह में दिन रात एक करके सरकारी पैसे का जमकर दुरुपयोग कर अपने चहेते मतदाताओं के यहा कंक्रीट […]
-बस बजट खपाने और भुगतान करने की कवायद में जुटा अमला
-वहीं आमजन पिछले 5 वर्ष के कार्यों की जांच पर एकजुट
dholpur, राजाखेड़ा. प्रशासक बने सरपंचों ने विभागीय अधिकारियों के कथित मोन स्वीकृति से पिछले 3 माह में दिन रात एक करके सरकारी पैसे का जमकर दुरुपयोग कर अपने चहेते मतदाताओं के यहा कंक्रीट खरंजों के निर्माण में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इस सब पर निगाह रखने को जिम्मेदार पंचायत समिति, इसके अधीनस्थ अभियंता, ग्राम विकास अधिकारी सरपंच बने प्रशासकों की मनमानी पर नियंत्रण रखने में या तो असफल साबित हो रहे हैं या नियंत्रित करना ही नहीं चाह रहे। जिसका खामियाजा सरकारी धन के दुरुपयोग और घटिया निर्माण के चलते दशकों तक आमजन को उठाना पड़ेगा
प्रशासकों के काम की रफ्तार लोगों को शंका में डाल रही है कि पिछले दो वर्ष से थमे हुए विकास कार्यों को सिर्फ 20-25 दिन में ही करने की आखिर ऐसी क्या जल्दी या हड़बड़ी है कि निर्माण कार्यों को रातों के अंधेरे में भी किया जा रहा है। इन कार्यों को दिन की रोशनी में भी किया ही का सकता है। आखिर किसकी निगाहों से छुपाने के प्रयास चल रहा है और विभाग का तकनीकी व प्रशासनिक अमला इन रात के अंधेरों में कार्यों को क्यों नहीं रोक पा रहा है।
उत्तनगन के मिट्टी जैसे रेता पर नहीं की कार्रवाई
कंक्रीट मिक्सिंग प्लांट में गड़बडिय़ों की पंचायत समिति के उच्चाधिकारियों को सूचना दिए जाने के बाद भी नदी के मिट्टी जैसे रेता की रोकथाम नहीं कि गई है। ऐसे में अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर किस दबाव के चलते वह सरकार की गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्यों को करने की मंशा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में इन निर्मित संपत्तियों का जीवनकाल कितना कम होगा वह अपने आप ही समझा जा सकता है। कमजोर कंक्रीट की कंप्रेसिंग स्ट्रेंथ के मायने विभाग के इंजीनियर आखिर क्यों नहीं देख पा रहे।
अधिकारियों ने चुप्पी साधी
इस मुद्दे पर विकास अधिकारी नवल सिंह से बात करने की कोशिश की गई पर काल अटेंड नहीं किया गया। उनका पक्ष जानने के लिए व्हाट्सएप मेसेज भी भेजा गया जिस को भी देख कर अनदेखा कर दिया गया। जिससे ऐसा लगा कि वे भी पत्रिका और आमजनता के सवालों से बचते हुए नजर आ रहे हैं, जबकी उनको अंधेरे में कंक्रीट सडक़ निर्माण, कंक्रीट मिक्सिंग प्लांट पर मिट्टी जैसे रेत की मिक्सिंग के वीडियो भी भेजे गए। अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच भी की बताई गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर मौन हो जाना चिंताजनक दिख रहा है।
आम जनता जानती है कि पंचायती राज के निर्माणों की हकीकत क्या है? बस विभाग के अधिकारी ही नहीं समझते या समझना नहीं चाहते। अगर प्रशासन उच्च स्तरीय जांच कराए तो एक भी कार्य मानकों पर नहीं है।
राजीव अलपुरिया, पूर्व व्यापार मंडल सचिव
पत्रिका में खबर के बाद में खुद प्लांट पर गया था, लेकिन संचालकों ने प्लांट बन्द कर दिया था। सडक़ों की जांच करेंगे, लेकिन निर्माण से 28 दिन तक कोर कटिंग भी नहीं हो सकती। ऐसे में संदिग्ध कार्यों का भुगतान जांच होने तक रोकेंगे।
रंजीत चतुर्वेदी, कनिष्ठ अभियंता पंचायत समिति