
धौलपुर. शिक्षा विभाग ने राजकीय स्कूलों में नामांकन बढ़ाने एडी चोटी का जोर लगा दिया, फिर भी गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 2247 बच्चों का नामांकन कम ही रह गया। मौजूदा समय में जिले के 774 प्रारंभिक स्कूलों में 52056 बच्चों का ही नामांकन है। हालांकि ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म और स्कूल खुलने के बाद विभाग को नामांकन बढ़ाने की उम्मीद है।
राजकीय स्कूलों में अव्यवस्थाओं की भरमार अभिभावकों को सता रही है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी से लेकर जर्जर स्कूल भवनों की समस्याओं को शिक्षा विभाग अभी तक खत्म नहीं कर सका है। अब इन अव्यवस्थाओं के बीच शिक्षा विभाग के सामने स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की भी चुनौती आ रही है। जिसको लेकर विभाग ने नवीन सत्र प्रारंभ होने से पहले ही प्रवेशोत्सव के लिए चार चरणों में बच्चों का सर्वे कार्य प्रारंभ कर दिया था। यह सर्वे राज्य सहित जिले के समस्त विद्यालयों में 27 मार्च, 6 अपे्रल, 10 अप्रेल एवं 15 अपे्रल को सघन अभियान के तौर पर चलाया गया था। जिसमें संस्था के 25 प्रतिशत कार्मिकों की ड्यूटी भी लगाई गई। इस दौरान घर-घर जाकर 3 से 18 साल तक के ऐसे बच्चे जो ड्रॉप आउट हैं या किसी कारणवश शिक्षा से दूर हैं उनको चिह्नित कर उसका डाटा शाला दर्पण पर अपलोड कर शिक्षा से जोडऩा रहा। देखा जाए तो इस अभियान का भी कुछ ज्यादा असर दिखाई नहीं पड़ रहा। यही कारण है कि जिले का नामांकन पिछले वर्ष की तुलना में पिछड़ता हुआ लग रहा है।
गत वर्ष 54 हजार 303 नामांकन
मौजूदा समय में जिले के राजकीय प्रारंंभिक स्कूलों में नामांकन की बात करें तो जिले के छह ब्लॉकों के 774 प्रारंभिक स्कूलों में 52 हजार 56 बच्चों का नामंकन दर्ज है। जिनमें 25125 छात्र तो 36931 छात्राएं शामिल हैं। इन ब्लॉकों में सबसे ज्यादा नामांकन धौलपुर ब्लॉक में 11421 बच्चों का दर्ज है। यह नामांकन गत सत्र के नामांकन से 2247 कम है। गत सत्र में जिले के प्रारंभिक स्कूलों में 54 हजार 303 बच्चों का नामांकन दर्ज था। देखा जा तो गिरावट विभाग के प्रवेशोत्सव के तहत चार चरणों में अभियान चलाने के बाद है। हालांकि अभी भी शिक्षा विभाग का मानना है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म हो चुके हैं और अब फिर नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
जर्जर स्कूल भवनें सबसे बड़ी चुनौती
शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या जर्जर स्कूल और कक्षा कक्षों की है। जानकारी के अनुसार जिले 774 प्राथमिक स्कूलों में से 36 स्कूल ऐसे हैं जो पूर्ण रूप से जर्जर हो चुके हैं। तो वहीं 337 स्कूल आंशिक रूप से जर्जर है, जबकि 336 स्कूल मरम्मत के योग्य हैं, बचे शेष 67 स्कूल ही पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में कोई हादसा न हो इसको लेकर बच्चों की पाठशालाएं अन्यंत्र जगहों पर संचालित की जा रही हैं। इस स्थिति में विभाग के सामने बच्चों को पाठशाला से जोडऩा एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहेगा।
शिक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि राजकीय स्कूलों में गिरता नामांकन अचंभित करने वाला नहीं है। झालावाड हादसे के बाद तो होना ही था। एक ओर जहां स्कूलों में शिक्षकों से लेकर व्याख्याता और प्रिंसिपलों के सैकड़ों पद रिक्त हैं तो वहीं जिले तमाम स्कूल भवन सहित कई कक्षा कक्ष पूर्ण रूप से जर्जर हो चुके हैं। जिन्हें सरकार ने गिराने के साथ नवीन बनाने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक इस मामले में कुछ भी नहीं हो सका। अब ऐसी स्थिति में कौन अभिभावक अपने बच्चों को इन स्कूलों में भेजने का साहस करेगा।
एक्सपर्ट व्यू...
शिक्षा तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है। इस पर सरकार और शिक्षा विभाग ध्यान दें। विभाग को सबसे पहले जर्जर विद्यालयों और कक्षा कक्षों की मरम्मत सहित नवीनीकरण कराना चाहिए साथ बच्चों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। तब ही विभाग अभिभावकों का भरोसा जीत पाएगा। अन्यथा अव्यवस्थाओं के बीच बच्चों का भविष्य कैसे संवारा जा सकता है।
- अरविंद शर्मा, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी
जिले के स्कूलों में नामांकन की स्थिति
ब्लॉक स्कूल नर्सरी-यूकेजी 1 से 5 6 से 8,
बाड़ी 139 00 6615 2764
बसेड़ी 98 46 4884 2265
धौलपुर 157 00 8343 3078
राजाखेड़ा 164 18 6255 2073
सैंपऊ 106 00 6416 2605
सरमथुरा 110 00 4748 1946
कुल 774 64 37261 14731