
राजाखेड़ा एरिया में खनन (फोटो पत्रिका नेटवर्क)
Dholpur, राजाखेड़ा उपखंड क्षेत्र के बीहड़ क्षेत्रों में हो रहे भारी मिट्टी खनन और खुले डंफरों में परिवहन से उड़ते धूल के गुबार अब लोगों की सांसों पर संकट खड़ा कर रहे हैं। दिन भर डंफरों के भारी परिवहन से उड़ते धूल के गुबार वातावरण को खराब कर रहे है और इन गुबारों में समाहित पीएम 2.5 और पीएम 10 के घुले कण लोगों की सांसों में होकर फेंफड़ों में जमा हो रहे हैं। इस गोरखधंधे में जुड़े खनन और ईंट भट्टों माफिया को न तो लोगों के जीवन की चिंता है न वायु प्रदूषण की, बस चिंता है तो अपनी जेबों को इस काली कमाई से भरने की।
बीहड़ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जेसीबी सैकड़ों डम्फर दिन रात बीहड़ों को तोडक़र मिट्टी के पहाड़ ईंट भट्टों पर लगा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में स्थापित 100 से अधिक वैध अवैध ईंट भट्टों में ईंट बनाकर मोटी कीमत पर बेचकर मोटी कमाई कर सकें। इस गलीज धंधे में जहां क्षेत्र के एतिहासिक बीहड़ और वन क्षेत्र भी पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर आ चुका है। जहां सरकार इस बीहड़ क्षेेत्र को पर्यटन की अपार सम्भवनाओं का द्वार देख रही है, वहीं खनन और भट्टा माफिया इस सपने को हमेशा के लिए ध्वस्त करने में पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है। ऐसे में सरकार की आगामी योजनाओं को धरातल पर उतरना भी संभव नहीं हो सकता।
काली कमाई का बड़ा स्रोत
अवैध खनन माफिया और भट्टा माफिया के लिए बीहड़ काली कमाई का बड़ा स्रोत बन चुके हैं, जहां खनन के लिए न तो मिट्टी का भुगतान करना है न ही किसी मंजूरी की जरूरत है। इसमें होने वाली कमाई पूरी तरह नकद में होती है। जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता और यह लाखों रुपए प्रतिदिन में होती है। ऐसे में यह कमाई पूरी तरह से माफिया के लिए टेक्स फ्री होती है जिसका कोई हिसाब किताब नहीं होता और केंद्र का आयकर की चोरी भी दिन रात हो रही है इसके ऊपर किसी की निगाह तक नही है।
बढ़ रहे सांस रोगी
इस सारे काले धंधे का खामियाजा उठाने पर मजबूर है आम नागरिक जो दिन भर माफिया के धूल के गुबारों को फांक कर सांस के रोगी बन रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इस धूल में पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण बड़ी मात्रा में होते हैं, जो एयर क्वालिटी इंडेक्स के सबसे महत्वपूर्ण भाग है जो वायु गुणवत्ता को सर्वाधिक प्रभावित करते हैं और लोगों के स्वशन तंत्र को पूरी तरह बर्बाद कर रहे हैं। खासतौर से बुजुर्गों को इस सबसे सर्वाधिक खतरा पैदा हो रहा है। स्कूली बालक और घर रहने वाले मासूमों को तो यह तक नहीं पता कि इसके दुष्परिणाम उन्हे जिंदगी भर झेलने को मजबूर होना पड़ेगा।
अवैध खनन बेहद गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर निश्चित कार्रवाई कराई जाएगी।
-दीप्ति देव तहसीलदार राजाखेड़ा
Updated on:
01 Jul 2026 07:29 pm
Published on:
01 Jul 2026 06:49 pm
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