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Dholpur: संकट के साए में सरकारी जमीनें, भूमि को निगल रहा अवैध खनन

राजाखेड़ा में संचालित 100 से अधिक वैध, अवैध ईंट भट्टे अब अन्नदाता के खेतों को तो मिट्टी खनन करके खत्म कर ही चुके है। सरकारी भूमि भी इन खनन माफिया की भेंट चढक़र भारी गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
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धौलपुर

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Naresh Kumar Lawaniyan

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Updated: 30 Jun 2026, 5:47 PM IST

Dholpur news

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Dholpur, राजाखेड़ा. प्रशासनिक और राजनीतिक वरदहस्त के चलते राजाखेड़ा में संचालित 100 से अधिक वैध, अवैध ईंट भट्टे अब अन्नदाता के खेतों को तो खनन करके खत्म कर ही चुके है। सरकारी भूमि भी इन खनन माफिया की भेंट चढक़र भारी गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। भारी मशीनों से दिन रात चलता खनन जहां पर्यवरण को नष्ट कर रहा है, वहीं इससे उठने वाले धूल के गुबार सांसों पर भी संकट पैदा कर रहे हैं।

मजबूरन खनन का शिकार होकर जहां अन्नदाता भी कृषि को छोडऩे के लिए मजबूर हो रहा है वहीं सरकारी जमीनों से खनन कर मुफ्त की मिट्टी से खनन माफिया के साथ भट्टा माफिया के भी बारे न्यारे हो रहे हैं। इस सारे गोरखधंधे से आगामी वर्षों में क्षेत्र के कृषि विहीन होने का भी खतरा पैदा होता जा रहा है। लेकिन कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्र में संभावित ऐसे खतरनाक हालात के बारे में ना तो प्रशासन सोच रहा है और ना ही रसूखदार भट्टा कारोबारी और अगर हालात नहीं सुधरे तो रोजगार के अभाव में या तो यहां से अन्य राज्यों के लिए हो रहा पलायन बेहद तेज हो जाएगा या बढ़ती बेरोजगारी से अपराधों में बेतहाशा वृद्धि होने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

प्राकृतिक पर्यावरण हो रहा तबाह

ग्रमीणों के अनुसार पिछले एक वर्ष से माफिया का धावा नयागांव सोमनाथ मंदिर के पीछे का बीहड़ है। जहां भारी खनन से उत्तनगन नदी के खांडरों का क्षेत्र समाप्त प्राय: हो चुका है और कई जगह तो खनन क्षेत्र में बीस-बीस फीट के गड्ढे तक हो चुके हैं। इससे यहां का वन क्षेत्र भी समाप्त हो गया है साथ ही यहां जंगल में रहने वाले जीव जंतु भी पलायन कर चुके हैं या शिकार हो चुके हैं।

दिन प्रतिदिन बिगड़ रहे हालात

प्रत्येक भट्टे में प्रतिवर्ष 30 से 50 लाख ईंटों की थपाई होती है। जिसके लिए प्रतिवर्ष प्रति भट्टा 6 से 7 बीघा से भी अधिक कृषि भूमि का खनन करता है। ऐसे में औसतन प्रति वर्ष 500 बीघा भूमि से खनन कर उसे अकृषि योग्य कर दिया जाता है। यह सिलसिला पिछले ढाई दशक से निरंतर जारी है। जानकारों की मानें तो अब तक दस हजार बीघा कृषि भूमि अवैध खनन की चपेट में आ चुकी है।

खनन माफिया दिन रात हावी

ईंट भ_ों का सहयोगी खनन माफिया क्षेत्र में पूरी तरह हावी है। हजारों एकड़ बीहड़ों के खांदरों को ये माफिया अपनी भारी मशीनों से खोदकर भट्टों तक पहुंचा चुका है। एक माफिया ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि क्षेत्र में 100 डम्फर सिर्फ मिट्टी परिवहन के काम मे लगे हैं साथ ही सैकड़ों ट्रेक्टर ट्रॉली, 50 से अधिक जेसीबी और लोडर भी दिन रात इस कार्य को कर रहे हैं, जिनसे हालात की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है। लेकिन जिम्मेदारों की आंखें क्यों बन्द हैं यह आमजन नहीं समझ पा रहा है। अधिकांश डम्फर अन्य राज्यों के हैं, जो भारी टेक्स चोरी भी कर रहे हैं। जेसीबी मशीनें भी इस क्षेत्र में 100 से अधिक आ चुकी हैं जो दिन रात धरती को चोटिल कर रही हैं।