
धौलपुर.कर्मियों की मार झेल रही नगर परिषद सहित जिले की शहरी निकायें प्रशासनिक फेरबदल के बाद पंगु हो चुकी हैं। नगर परिषद से जहां 14 अधिकारी और कर्मचारियों का स्थानांतरण हुआ तो अन्य निकायों में भी अहम पद खाली हो चुके हैं। जिसका सीधा असर रोजमर्रा के कार्यों सहित निकायों की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। तो वहीं पहले से ही बजट के अभाव में आधा दर्जन बड़े प्रोजेक्ट अधर में पड़े हैं।
शहरी प्रशासन का दर्जा प्राप्त नगर परिषद के हाल बेहाल हैं। एक ओर जहां साफ-सफाई सहित रोजमर्रा के कार्य प्रभावित होते रहे हैं, तो वहीं प्रशासनिक फेरबदल और बजट के अभाव के कारण विकास के भी कार्य अवरुद्ध हो रहे हैं। देखा जाए तो स्थानांतरण एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों का तबादला सर्वविदित है, लेकिन जिन कर्मचारी और अधिकारियों का स्थानांतरण के बाद उनके स्थान पर नई नियुक्ति न की जाए तो उस संस्था के कार्य प्रभावित होना लाजिमी है और अगर पहले से ही संस्था कर्मचारियों के अभाव से जूझ रही हो तो मामला और गंभीर हो जाता है। गत दिनों सरकार के द्वारा जारी सूचियों में नगर परिषद से14 कर्मचारियों और अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया। जिनमें परिषद के कार्यकारी आयुक्त, जेइएन, एएसआई, जेएलओ, दो बाबू, अग्निशमन प्रबंधक, तीन फायर मैन सहित चार सफाई कर्मचारियों को अन्यंत्र जगहों पर तैनाती दी गई। हालांकि जयपुर मुख्यालय एपीओ किए गए कार्यकारी परिषद आयुक्त विष्णु परमार को दो दिन बाद पुन: धौलपुर परिषद में ही आयुक्त के पद पर तैनाती दे दी गई। तो वहीं एइएन दीपक गोयल को बाड़ी ईओ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपने से अब उन्हें दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ेगा।
सडक़ बनाने के लिए बजट ही नहीं
शहर में परिषद की कार्यप्रणाली पहले से जग जाहिर है। जहां चहुंओर लगे गंदगी के ढेर, चौक नालों और सीवरों से बहता गंदा पानी, सडक़ों पर होता जलभराव और जर्जर सडक़ें सारी कहानी खुद बयां करती हैं। मानसून के सीजन में हालत और खराब और खराब है। परिषद में एक साथ एक दर्जन कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद नवीन पदस्थापना नहीं होने से हालात गड़बड़ाने लगे हैं। नतीजा यह कि साफ-सफाई, जलभराव सहित अन्य विकास कार्यों सहित अन्य कार्यों की फाइलें अटकने लगी हैं। तो वहीं बजट के अभाव के कारण शहर की सडक़ों का निर्माण सहित चार से पांच प्रोजेक्ट का काम रुका पड़ा है। जिनमें नर्सरी क्षेत्र में बनने वाला पंप हाउस, तगावली स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं। बजट के अभाव के कारण शहर की सडक़ों का निर्माण करने वाले संवेदक को बजट आवंटित नहीं हो पा रहा, जिस कारण २७ छोटी-बड़ी सडक़ों में से केवल तीन से चार सडक़ों का ही निर्माण अभी हो सका है।
डेढ साल से स्थायी आयुक्त की तलाश
गत वर्ष एसीबी की कार्रवाई के दौरान अपना पद गंवाने वाले अशोक शर्मा के बाद से ही धौलपुर नगर परिषद को एक स्थायी आयुक्त की तलाश है। स्थायी आयुक्त नहीं मिलने के कारण अभी तक प्रशासन कार्यकारी आयुक्त के भरोसे शहरी सरकार को चलाने का कार्य कर रहा था। पहले एक्सइएन गुमान सिंह सैनी, फिर एसडीएम कर्मवीर ङ्क्षसह फिर एक्सइएन गुमान ङ्क्षसह सैनी को कार्यकारी आयुक्त का पद दिया गया, लेकिन तथाकथिक वीडियो वायरल के बाद उनको यहां से हटा उनका मुख्यालय जयपुर कर दिया गया। जिसके बाद मनियां-राजाखेड़ा इओ का कार्यभार संभाल रहे विष्णु परमार को धौलपुर इओ का दायित्व सौंपा, लेकिन गत दिनों उनको एपीओ को जयपुर मुख्यालय भेज दिया, हालांकि दो दिन बाद उनको पुन: धौलपुर नगर आयुक्त का कार्यभार सौंप दिया गया, लेकिन पिछले डेढ साल से आयुक्त की कुर्सी पर स्थायी आयुक्त नहीं होने के कारण शहर के विकास कार्यों सहित आम नागरिकों के कार्य अधर में हैं तो वहीं परिषद के कर्मचारी भी अधिकारी विहीन कुर्सी होने के कारण आनाकाना करते नजर आते हैं।
राजाखेड़ा, सैंपऊ और मनियां में ईओ के पद खाली
ऐसा नहीं है कि कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी से धौलपुर नगर परिषद ही जूझ रही हो। जिले की अन्य शहरी निकाय जिनमें राजाखेड़ा, सैंपऊ और मनियां नगर पालिका भी उच्च अधिकारी यानी ईओ की कमी से जूझ रही हैं। राजाखेड़ा और मनियां में जहां विष्णु परमार इओ की जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन अब उन्हें धौलपुर नियुक्त करने से यह दोनों जगहें खाली हो चुकी हैं तो वहीं वहीं सैंपऊ ईओ को एपीओ कर दिया गया, लेकिन सरकार उनके बदले अभी तक कोई नया ईओ नियुक्त नहीं कर सकी है। जिस कारण नगर पालिकाओं में मुख्य कार्यों सहित अन्य कार्यों के निपटारे में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।