
सिलेंडर
धौलपुर. उज्जवला योजना धारक महिलाएं सिलेंडर छोड़ फिर चूल्हों पर धुआं और राख का सामना करने को मजबूर हो रही हैं। दरअसल 962 रुपए का सिलेंडर भरवाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। उस पर भी सरकार ने नया नियम लागू कर दिया कि अब साल में केवल चार सिलेंडरों पर ही 300 रुपए की सब्सिडी मिलेगी। यानी साल के बाकी 8 महीने गरीबों को बिना किसी राहत के उज्ज्वला गैस सिलेंडर की पूरी कीमत चुकानी होगी। नतीजा यह हुआ कि महिलाओं ने सिलेंडरों को कोने में रख दिया है और सुबह-शाम चूल्हे के लिए सूखी लकडिय़ां और उपले के इंतजाम में लग जाती हैं।
समय के साथ उज्जवला की भी चमक फीकी पड़ती जा रही है। कारण सरकार के योजना को लेकर नए-नए आदेश। दरअसल सरकार के चार सिलेंडरों पर सब्सिडी सीमित करने से उज्जवला धारक महिलाएं परेशान हैं। जिनका गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। महिलाओं ने सरकार आड़े हाथों लेते खरी खोटी सुनाई। कागजी दावों और चुनावी रैलियों में भले ही 10 करोड़ से ज्यादा मुफ्त कनेक्शन बांटने की पीठ थपथपाई गई हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के गाल पर एक कड़ा तमाचा है। देखा जाए तो एक औसत परिवार के लिए एक सिलेंडर एक या डेढ़ माह तक ही उपयोग होता है। जिस कारण साल में लगभग १० सिलेंडर की धारकों को जरूरत होती है। अब ऐसे में केवल चार सिलेंडरों पर सब्सिडी देने से गरीब तबके के लोगों को शेष सिलेंडरों का मूल्य पूरा चुकाना पड़ रहा है, जबकि सिलेंडरों के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। जिस कारण शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में उज्जवला धारक गैस को दरकिनार कर फिर पारंपरिक चूल्हे पर लौट रही हैं।
महिलाओं का फूटा गुस्सा, सुनाई खरी-खरी
महिलाओं ने बताया कि सरकार ने चुनाव के समय उन्हें मुफ्त (सब्सिडी) गैस सिलेंडर का लालच दे दिया और गैस पर खाना पकाने की आदत डाल दी। पहले 12 सिलेंडर और उसके बाद 9 सिलेंडर, लेकिन अब साल में 4 सिलेंडर देने का फरमान जारी करने से सरकार इस योजना को सीमित कर रही है। ग्रामीण महिला रामकली हीराबाई, गीता और ममता ने बताया कि 960 रुपए से अधिक का गैस सिलेंडर हम गरीब कहां से भरवाएं। अब साल में सिर्फ 4 सिलेंडर पर छूट के मिलेंगे। दो महीना हो गया, लेकिन भरा हुआ सिलेंडर नहीं मिला है। जिसके बाद सिलेंडर और चूल्हा को घर के कौने में रख दिया और अब चूल्हे पर खाना और अन्य सभी काम कर रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि आंखों में धुआं जाता है तो रो-रोकर खाना बना रहे हैं और सिलेंडर मिल नहीं रहे हैं, खाते में सब्सिडी भी 6 महीने से नहीं आई है।
सरकारें समर्थन पाने प्रारंभ करती हैं योजनाएं
देखा जाए तो सरकार तमाम तरह की योजनाएं प्रारंभ कर लोगों का समर्थन पाने का प्रयास करती हैं। इस कड़ी मेें ऐसी कई योजना संचालित भी हो रही हैं। मुफ्त में गैस कनेक्शन बांटकर हेडलाइंस बटोरना बेहद आसान है, लेकिन उस योजना को गरीबों की जेब के अनुकूल बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। साल में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर का यह नियम गरीबों के पेट और रसोई पर सीधा हमला है, जिनके सदस्य मजदूरी, मेहनत कर घर परिवार का लालन-पोषण कर रहे हैं।
ईरान युद्ध के समय हुए परेशान
अमेरिका-इरान युद्ध के दौरान उज्जवला योजना के सिलेंडरों को लेकर भी लोग परेशान होते रहे। रसद विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में दो लाख 73 हजार 617 गैस कनेक्शन हैं। जिनमें से एक लाख 69 हजार 314 कनेक्शन उज्ज्वला योजना के हैं। अमेरिका-ईरान संकट के बाद सरकार ने सिलेंडरों की आपूर्ति में सख्त कदम उठाए थे। जिस कारण शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन के बाद बुकिंग के आदेश दिए। युद्ध संकट से पहले ग्रामीण क्षेत्र में सिलेंडर की गाड़ी जाती थी और तुरंत उपभोक्ता को सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब लोगों को परेशानी आ रही है। पहले उपभोक्ता को बुकिंग करानी पड़ेगी और उसके चार-पांच दिन बाद आपूर्ति मिल जाएगी। हालांकि, समझौता होने पर कुछ राहत दिखी लेकिन दोनों देशों में फिर से युद्ध छिडऩे से हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
Updated on:
21 Jul 2026 07:14 pm
Published on:
21 Jul 2026 07:14 pm
