
धौलपुर. केन्द्र और राज्य सरकार आम आदमी की समस्याओं को निपटारे के लिए पोर्टल पर शिकायत लेकर उन्हें संबंधित विभागों को निस्तारण को भेजती है। लेकिन कई शिकायतों का निपटारा ऑनलाइन ही हो जाता है जबकि जमीन पर रत्ती भर पर सुधार नहीं होता है।
कई परिवादों में इस तरह के मामले आ चुके हैं लेकिन इसके बाद भी संबंधित पोर्टल पर बैठे जिम्मेदार कार्मिक और अधिकारियों का खास फर्क नहीं है। न ही ग्राउंड रियलिटी चेक होती है, विभाग ने जो भेज दिया, उसके आधार पर ही समस्या का निस्तारण करने का संदेश शिकायतकर्ता के मोबाइल पर भेज दिया जाता है। शिकायतकर्ता संदेश देख आग बबूला हो जाता है लेकिन इस सरकारी सिस्टम के आगे नतमस्तक है। हालांकि, सरकार सुशासन का दावा करती है लेकिन वह जमीन पर अभी कोसों दूर है। ऐसा ही एक शिकायत का मामला आया है। शहर की पंचवटी कॉलोनी के एक व्यक्ति ने शिकायत की थी और अब संदेश आया कि निस्तारण कर दिया। वह हाल देख निराश है। उधर, नगर परिषद ही नहीं कई विभाग इसी तरह जवाब दे रहे हैं। जबकि बैठकों में जिला कलक्टर लगातार अधिकारियों को शिकायतों को गंभीरता से लेने की हिदायत देते हैं लेकिन इसके बाद भी शिकायतों के निस्तारण के साथ मजाक हो रहा है। जो सरकार के सुशासन के उद््देश्य को धक्का पहुंचा रहा है।
सीवरेज और फिर बारिश से बढ़ी मुश्किलें
शहर में सैंपऊ और बाड़ी रोड स्थित कई कॉलोनियों की वैसे तो बीते दो साल से दुर्गति बनी हुई है लेकिन मानसूनी बारिश के दौरान अब फिर कॉलोनियों के रास्ते जलभराव और सीवरेज के गंदे पानी से भरे हुए हैं। शहर में मानसरोवर, पोखरा, अयोध्या कुंज, राम कुंज, न्यू आदर्शनगर, दारा सिंह नगर, आंनद नगर, पंचवटी, पोखरा और नर्सरी रोड समेत कॉलोनियों की हालत खराब है। नगर परिषद केवल पंप सेट लगाकर समस्या को सुलझाना समझ रहा है जबकि यहां निवास कर रहे लोगों की पीड़ा का सिस्टम अभी तक निस्तारण नहीं कर पाया है। हालांकि, जिला प्रशासन ने प्रयास भी किए लेकिन वह तकनीकी कारणों से कोर्ट में पेच फंस गया। जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद खराब है।
परिवाद से खिलवाड़, कार्रवाई भी नहीं...
शहर में कुछ समय पहले जलभराव, सीवरेज समस्या समेत अन्य की साक्ष्यों के साथ करीब 350 पन्ने की रिपोर्ट और 20 पेज की शिकायत राष्ट्रपति को भेजी गई। जिस पर राष्ट्रपति कार्यालय ने शिकायत को राजस्थान सीएस को भेज दी। इसके बाद रोचक कहानी शुरू होती है। शिकायत पोर्टल पर आती है और फिर शिकायत को नगर परिषद धौलपुर भेजने की बजाय बसेड़़ी पीडब्ल्यूडी, यहां से बाड़ी और फिर धौलपुर एसई कार्यालय भेज दी जाती है। अंत में शिकायत को संबंधित विभाग ने नहीं होना बता दिया टकरा देते हैं। इसी तरह एक शिकायत धौलपुर नगर परिषद की थी उसे सैंपऊ नगर पालिका भेज दिया जो खुद अभी पैरों पर नहीं खड़ी है।
वित्त विभाग भेजी शिकायत फिर लापता...
इसी तरह करोड़ों रुपए जमीन को खुदर्बुद करने की मुस्कान समिति ने वित्तमंत्री को शिकायत भेजी। वहां से शिकायत गृह सचिव और फिर राजस्थान के सीएस को भेज दिया। सीएस कार्यालय से शिकायत को डीजीपी और वहां से आर्थिक अपराध शाखा को भेज दी। यहां से शिकायत को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय भेजा। एसपी कार्यालय ने समिति सचिव से जानकारी ली। जिस पर कहा कि शिकायत आर्थिक शाखा को जांच के लिए भेजा है। इसके बाद शिकायत को नगर परिषद कार्यालय भेज दिया। यहां पर बाबू ने लिख दिया कि नॉट रिलेटेड टू नगर परिषद धौलपुर...। फिर शिकायत लापता हो गई।
- जलभराव की वजह से निकलना मुश्किल हो रहा है। कोई देखने वाला नहीं है। बच्चे और बुजुर्ग परेशान हो रहे हैं।
- रणधीर डागुर, पंचवटी कॉलोनी
- कोई सुनने वाला नहीं है। शिकायतें करके थक चुके हैं। अब तो पानी में से निकलने की आदत सी हो गई है। कई दफा लोग गिर चुके हैं।
- कमल सिंह कुशवाह, पंचवटी कॉलोनी