– गर्भपात के शिकायत पर अल्ट्रासाउंड, महिला को बताया ३ माह की प्रेग्नेंसी- पीडि़ता ने परिजनों के साथ एसडीएम से की शिकायत, एसडीएम दंग – अस्पताल पहुंचे चिकित्सकों को लगाई फटकार – प्रार्थना पत्र पर अब जांच के निर्देश dholpur, राजाखेउ़ा. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाहियां गाहे बगाहे सुर्खिया बनती रहती है लेकिन परिवार कल्याण जैसे […]
- गर्भपात के शिकायत पर अल्ट्रासाउंड, महिला को बताया ३ माह की प्रेग्नेंसी- पीडि़ता ने परिजनों के साथ एसडीएम से की शिकायत, एसडीएम दंग
- अस्पताल पहुंचे चिकित्सकों को लगाई फटकार
- प्रार्थना पत्र पर अब जांच के निर्देश
dholpur, राजाखेउ़ा. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाहियां गाहे बगाहे सुर्खिया बनती रहती है लेकिन परिवार कल्याण जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में गंभीर लापरवाही का एक नया प्रकरण राजाखेड़ा में सामने आया है। जहां नसबंदी के एक माह बाद ही पीडि़ता 3 माह की गर्भवती बताई गई। जबकि नसबंदी के 20 दिन बाद ही पीडि़ता गर्भवती हो गई, तो उसका गर्भपात भी कर दिया गया था। पीडि़ता परिजनों के साथ सोमवार को उपखंडाधिकारी सुशीला मीणा से मिली ओर सारा घटनाक्रम बताकर लिखित आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रकरण देख स्वयं एसडीएम दंग रह गईं। एसडीएम तुरंत ही पीडि़ता को लेकर शहीद राघवेंद्र सिंह उप जिला चिकित्सालय पहुंची और चिकित्सको की जमकर क्लास लगाई और पूर्ण जांच के निर्देश दिए।
गंभीर है मामला
30 वर्षीय पीडि़ता राजाखेड़ा पालिका क्षेत्र की कॉलोनी निवासी है। पीडि़ता ने चिकित्सकों के समक्ष एसडीएम को बताया कि गत 29 जनवरी को उसने नसबंदी ऑपरेशन कराया था। उस समय चिकित्सकों ने जांच में कुछ नहीं बताया। ऑपरेशन होने के कुछ दिनों बाद अचानक चेक किया तो प्रेग्नेंट थी जिसपर वह घबरा गई। पूरे घटनाक्रम की सूचना चिकित्सक को दी तो 18 फरवरी को चिकित्सको ने जांच कर गर्भपात कर दिया। फिर कुछ दिन बाद उसे पुन: कोई परेशानी हुई तो 28 फरवरी उसका अल्ट्रासाउंड किया। जिसमें उसे 3 माह की गर्भवती बताया। जिससे वह घबरा गई। उधर, चिकित्सकों ने उसे जवाब दिया कि प्राइवेट दिखाओ या धौलपुर जाओ हमारे पास कोई इलाज नहीं है जबकि गर्भपात यही किया गया था।
प्रकरण में गंभीर लापरवाही का अंदेशा
गौरतलब रहे कि नसबंदी ऑपरेशन प्राय: स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रेरित करने पर महिलाएं करवाती हैं। उनकी जिम्मेवारी होती है कि वे जिन महिलाओ का आपरेशन करवाना है उनकी कुछ दिन पहले से ही नियमित जांच आरम्भ कर देती हैं, जिससे कि वे गर्भवती न हो जाएं। उसके बाद भी आपरेशन से पूर्व भी चिकित्सालय में भी गर्भ की जांच की जाती है। और सुनिश्चित किया जाता है कि जिस महिला का ऑपेरशन होना है वह गर्भवती न हो। उसके बाद ही उंसका ऑपेरशन किया जाता है। ऐसे में दोनों ही स्तरों पर गंभीर लापरवाही बरती गई।
एक माह में दो बार कैसे गर्भधारणबड़ी बात
यह है कि 29 जनवरी को ऑपरेशन के दिन वह गर्भवती नहीं थी। लेकिन 18 फरवरी को गर्भवती पाए जाने पर गर्भपात किया गया। 10 दिन बाद ही पुन: अल्ट्रासाउंड करवाने पर वह 3 माह की गर्भवती बताई गई। ऐसे मे कैसे संभव हो सकता है यह एक बड़ा सवाल है।
- पीडि़त परिवार और महिला मेरे पास आए थे। मैं स्वयं उनके साथ चिकित्सालय गई और प्राथमिक जांच की है। मामला गंभीर है, इसकी गहन जांच करवाई जाएगी।
- सुशीला मीणा, एसडीएम राजाखेड़ा