डिंडोरी

रासायनिक खादों व कीटनाशकों के प्रयोग के बारे में बताया

गांव-गांव किसान सभा का आयोजन
2 min read
• •
Updated: 28 Sep 2018, 4:59 PM IST
Explained about the use of chemical fertilizers and pes
Explained about the use of chemical fertilizers and pes

डिंडोरी। प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विष्वविद्यालय द्वारा दूसरे दिन भी मडिय़ारास, गीधा, खरगहना, गाड़ासरई, गोरखपुर में जैविक खेती के करने के लिए शिविर का आयोजन किया गया। मडिय़ारास में रजनी बहन, संगीता बहन, चंद्रिका बहन, कृष्णा परमार, मदन सिंह ठाकुर, सालिक सिंग, रेस सिंग, प्रताप सिंग, मालगुजार, यशवंत ठाकुर, धरम सिंग, माखन प्रसाद पाठक, कृष्ण कुमार पाठक, दिनेश शर्मा, तरूण कुमार पाठक व माखन ंिसंग उपस्थित थे। खरगहना में हाई स्कूल पर कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां पर पूजा बहन, गोदावरी बहन, पीएन अवस्थी, डॉ आईसी चरणा, प्राचार्य प्रकाश मिश्रा सहित स्कूल स्टॉफ उपस्थित रहा। जहां यौगिक जैविक खेती की जानकारी दी। गाड़ासरई में उत्कृष्ट विद्यालय में बच्चों को नैतिक मूल्यों पर शिक्षा दी गई। गोरखपुर में अमरजीत सलूजा, सतीश शर्मा एवं सभी ग्रामवासी एवं भाई बहनें उपस्थित रहे। जहां पर सुवासित, उत्तम, पौष्टिक अन्न अपनाने की प्रेरणा, यौगिक जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया। रूसा में नीलकंठ साहू तथा ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
ब्रम्हाकुमारी संस्था द्वारा निकाली जा रही यात्रा में सभी ग्रामीण क्षेत्रों में शाश्वत यौगिक खेती करने के लिए लोगो को प्रेरित किया और रासायनिक खादों तथा कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया। अधिक पैदावार बढाने के लिए रासायनिक खादों तथा कीटनाशक जहर का अनियंत्रित उपयोग किया गया। जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ता गया। पर्यावरण को भारी क्षति पहुंची और उपजाऊ धरती बंजर होने लगी। आज का किसान जहां एक ओर खेती की लागत बढने, उत्पादों का उचित मूल्य न मिलने, प्राकृतिक प्रकोपो तथा मौसम के असामान्य उतार चढ़ाव से परेशान होकर आत्महत्या कर रहा है। वही दूसरी और अत्याधिक रासायनिक खादों तथा कीटनाशक जहर से तैयार अनाज, फल एवं सब्जियां मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैैं। इनके प्रयोग से अनेक प्रकार की बीमारियां और रोग बढते जा रहे है। युवा पीढी खेती करना नहीं चाहती। ग्रामीण युवा अपने लक्ष्य विहीन जीवन से परेशान होकर अनेक प्रकार के नशीले पदार्थो का सेवन कर रहा है। उसे अपना भविष्य अंधकारमय दिख रहा है वह गांव से पलायन के लिए मजबूर है। जिस खेती को उत्तम कार्य कहा जाता रहा है। वही अब किसानों को बोझ लग रही है। लोग इसे मजबूरी का कार्य समझने लगे हैं। विकास की धुरी कमजोर होने लगी है। निष्चित रूप से यह गंभीर समस्या है। जिसके समाधान की नितांत आवश्यकता है। परमपिता परमात्मा की प्रेरणा से प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग द्वारा गोकुल गांव स्वर्णिम भारत की स्थापना के लिए कृत संकल्प है। किसान सेवा रथ अलग अलग क्षेत्रों में भ्रमण करेंगे।

Updated on:
28 Sep 2018, 4:59 PM IST
Published on: