
कान बहना एक आम समस्या है। किसी भी आयुवर्ग के लोग इससे पीड़ित हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में कान में संक्रमण, पर्दे में छेद या हड्डी में गलाव पाया जाता है। इसकी मुख्य वजह लंबे समय तक जुकाम बने रहना होता है। बच्चों में कई बार नाक के पीछे एडिनोइड्स के बढऩे से भी ऐसा होता है। नाक व कान के मध्य स्थित यूस्टेकियन ट्यूब के ठीक से काम न करने से भी कई समस्याएं होने लगती हैं।
इसके उपचार के क्या तरीके हैं?
इलाज रोग की दशा व कई बार मरीज की उम्र पर भी निर्भर करता है। शुरुआत में कुछ लोगों में सही इलाज से यह ठीक हो जाता है। लेकिन ज्यादातर में कान के पर्दे में छेद या हड्डी का गलाव ठीक करने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है क्योंकि समय गुजरने पर पर्दे के छेद के सिरे स्थिर हो जाते हैं, जो दवाओं से नहीं भरते। दवा केवल कुछ समय के लिए मवाद बंद करती है। हड्डी में गलाव होने पर सर्जरी जरूरी हो जाती है।
लंबे समय तक कान बहने से क्या क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
जिन लोगों का कान लंबे समय से बहता है, उनमें हड्डी का गलाव इसके पास स्थित कई महत्वपूर्ण संरचनाओ को नुकसान पहुंचा सकता है। सुनाई कम देने के अलावा दिमाग में संक्रमण का खतरा रहता है, चेहरे की नस प्रभावित होने पर चेहरा टेढ़ा हो सकता है। चक्कर आ सकते हैं, कान के पास फोड़ा बन सकता है।
कान बहने वाले मरीजों को क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
समय पर उचित इलाज लें। कान में कोई द्रव्य जैसे गर्म तेल आदि न डालें। नहाते समय कान में पानी न जाने दें, इसके लिए तेल से चिकनी की हुई रुई लगाई जा सकती है। जुकाम व एलर्जी को नियंत्रण में रखें और इन्हें बढ़ने न दें।