
Cancer Prevention formula (image- geminiAI)
Cancer Prevention: कैंसर जैसी घातक और जानलेवा बीमारी का नाम सुनते ही हर कोई सहम जाता है, लेकिन क्या आपको पता है जिस बीमारी का सबसे बड़ा इलाज ही उसका बचाव है, तो फिर क्यों उस बीमारी से इतना डरना है? जब इस खतरनाक बीमारी से हम बच सकते हैं, तो बस इससे बचने के उपाय अपनाएं और कैंसर के डर को दूर भगाएं।
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. तरंग कृष्णा ने हाल ही में अपने एक वीडियो में यह जानकारी साझा की है कि कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बचना ही उसका इलाज तो है ही, उसके साथ कैंसर के इलाज में आप इस फॉर्मूले को अपनाकर जीत हासिल कर सकते हैं और उससे बच सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैंसर से बचने का और उसके इलाज का यह रास्ता क्या है? यह कैसे काम करता है और कैंसर के इलाज में कैसे सहयोग करता है?
कैंसर विशेषज्ञ का कहना है कि कैंसर से बचाव और उसके इलाज का सबसे बड़ा नियम यह है कि इन तीन चीजों का आपकी जीवनशैली में शामिल होना जरूरी है। आइए जानते हैं क्या है यह 33-33-33 का फॉर्मूला?
1.व्यक्तिगत इच्छाशक्ति (Personal Willpower) - 33%
हर बीमारी की जंग दिमाग से ज्यादा लड़ी जाती है, यही बात कैंसर के इलाज और बचाव में भी आती है। अगर आपके दिमाग ने यह बात मान ली, तो 33% कैंसर होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। जब मरीज अंदर से ठान लेता है कि उसे ठीक होना है, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बेहतर काम करने लगती है। असल में होता यह है कि जब हमारे शरीर में तनाव कम होता है, तो 'कोर्टिसोल' हार्मोन का स्तर कम होता है। यही हार्मोन हमारे शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाता है। जब इसकी मात्रा कम होगी, तो शरीर में कैंसर कोशिकाओं में भी कमी आएगी।
2.सपोर्ट सिस्टम (Support System) - 33%
सपोर्ट सिस्टम यानी परिवार! कैंसर विशेषज्ञ का कहना है कि जिन कैंसर मरीजों को परिवार का सहयोग मिलता है, उनके सही होने की संभावना उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है। उनका कहना है कि कैंसर के मरीजों के लिए परिवार का सहयोग उतना ही जरूरी होता है, जितना कि प्यासे को पानी। एक मरीज जो अकेले किसी गंभीर बीमारी से लड़ रहा है, उसकी तुलना में जिसके साथ परिवार खड़ा होता है, उसके सही होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। 33% इलाज का काम परिवार का सपोर्ट ही कर देता है।
3.सही इलाज (Correct Treatment) - 33%
कितनी भी गंभीर बीमारी क्यों न हो, उसके इलाज का प्रतिशत हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कड़ी में कैंसर से दूरी में तीसरा हिस्सा चिकित्सा विज्ञान का होता है। इसमें पहला स्थान आता है सही समय पर जांच का। अगर समय रहते या कहें कि पहली स्टेज में कैंसर का पता चल जाए, तो उसके ठीक होने का प्रतिशत भी उतना ही बढ़ जाता है। दूसरा यह है कि नीम-हकीमों या अंधविश्वास के चक्कर में पड़ने के बजाय सही कैंसर विशेषज्ञ (Oncologist) से परामर्श लेना आपके लिए ज्यादा कारगर साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
16 Jan 2026 01:21 pm
Published on:
16 Jan 2026 01:13 pm
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