रोग और उपचार

अगर आपके सांस नली में है सूजन, तो हो सकती है ये बीमारी, अटैक से बचाएगी सावधानी

अस्थमा (दमा) फेफड़ों में सूजन से जुड़ी बीमारी है। इसमें सांस लेने में परेशानी होती है। कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी होने लगती हैं। अस्थमा के लक्षण तब दिखते हैं, जब वायुमार्ग की परत में सूजन आ जाती है और आसपास की मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाता है।

3 min read
Jun 25, 2023

अस्थमा (दमा) फेफड़ों में सूजन से जुड़ी बीमारी है। इसमें सांस लेने में परेशानी होती है। कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी होने लगती हैं। अस्थमा के लक्षण तब दिखते हैं, जब वायुमार्ग की परत में सूजन आ जाती है और आसपास की मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाता है। इसके बाद बलगम इन वायुमार्गों में भर जाता है, जिससे यहां से गुजरने वाली हवा की मात्रा कम हो जाती है। इन स्थितियों के चलते अस्थमा का अटैक आता है। सावधानी ही इसमें बचाव है।

संभावित लक्षण
सांस लेने में घरघराहट, कर्कश या सीटी जैसे आवाजें, रात में या हंसते, व्यायाम करते समय खांसी आना, सीने में जकडऩ, बेचैनी, थकान, छाती में दर्द, तेज-तेज सांस लेना, बार-बार इंफेक्शन, नींद न आना आदि।

कारण
अस्थमा के लक्षण बच्चों में भी दिखते हैं। इनमें से ज्यादातर का उम्र बढऩे के साथ ठीक हो जाता है। जेनेटिक यानी आनुवांशिक, बचपन में किसी प्रकार का वायरल संक्रमण, किसी प्रकार की एलर्जी, बदलता हुआ मौसम, किसी जानवर का फर, पराग कण आदि।

अटैक के कारण
कुछ लोगों की एलर्जी भी अस्थमा अटैक का कारण बन सकती है। फफूंदी, पराग कण और पालतू जानवरों की रूसी जैसी चीजें शामिल हैं। अन्य कारणों में ज्यादा व्यायाम, तनाव, कोई बीमारी आदि।

इसके प्रकार
अस्थमा भी कई तरह के होते हैं जैसे कि बच्चों में होने वाला, वयस्कों को होने वाला, एलर्जी से या फिर रात्रि में होने वाला आदि।

पहचान कैसे हो
वैसे तो चिकित्सक बीमारी के लक्षण देखकर ही पता कर लेते हैं लेकिन कुछ फेफड़ों की जांचें भी होती हैं। इनमें स्पायरोमेट्री, पीक फ्लो और फेफड़ों के कार्य का परीक्षण शामिल है। थाकोलिन चैलेंज, नाइट्रिक ऑक्साइड टेस्ट, इमेजिंग टेस्ट, एलर्जी टेस्ट, बलगम आदि की भी जांच डॉक्टर सलाह से कराते हैं।

इसके इलाज में कई दवाइयां कारगर हैं। आमतौर पर इन्हेलर और एंटी इंफ्लामेटरी दवाएं ज्यादा प्रभावी हैं। इन दवाइयों से ब्रोंकॉडायलेटर्स यानी वायुमार्ग के चारों तरफ कसी हुई मांसपेशियों को आराम मिलता है। इसमें नेब्यूलाइजर का उपयोग भी फायदेमंद रहता है। अस्थमा में गंभीर अटैक आने पर डॉक्टर को दिखाकर ही दवाइयां लें।

क्या खाएं
हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा खाएं। विटामिन ए, सी और ई और एंटीऑक्सीडेंट्स वाली चीजें ज्यादा मात्रा में लें। लहसुन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च अनिवार्य रूप से लेना चाहिए। हमेशा फ्रेश फल-सब्जियां ही खाएं।

ऐसे होगा अस्थमा से बचाव
मरीजों को हमेशा सावधानी बरतनी रहती है। गर्मी के दिनों में धूल-धुआं, बारिश में फंगस-नमी और सर्दी में तापमान का ऊपर नीचे होना आदि। ज्यादा गर्म और नम वातावरण से बचना होता है। घर से बाहर निकलें तो मास्क लगाकर निकलें। प्रदूषण से भी बचाव होता है। अपनी दवाइयां खासकर इन्हेलर साथ रखना होता है। साफ-सफाई का ध्यान रखना होता है। डाइट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा वाली चीजें कम से कम लें। जंक-फास्ट फूड, सोडा ड्रिंक्स और नॉनवेज कम से कम या नहीं खाएं। डॉक्टरी सलाह से न्यूमोकोकल और इंफ्लूएंजा वैक्सीन जरूर लगवाएं। अगर कोविड वैक्सीन नहीं लगवाया है तो वह भी लगवा लें।

Published on:
25 Jun 2023 05:52 pm
Also Read
View All