
दुनियाभर में ग्लूकोमा रोग अंधता का दूसरा सबसे बड़ा कारण बनकर उभर रहा है। वैसे तो यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। लेकिन भारत में नेत्र रोगियों में 50 प्रतिशत लोग खासकर 40 से अधिक उम्र के कालापानी रोग से पीड़ित हैं। आमतौर पर इस बीमारी के लक्षण सामने नहीं आते। जब तक कि व्यक्ति को दिखना बिल्कुल बंद नहीं हो जाता। जानें इसके बारे में -
लक्षण
आंखों पर प्रेशर बढ़ने से आंख में दर्द, भारीपन और लालिमा दिखाई देती है। आसमान में देखने पर बुलबुले दिखने के अलावा नजर या दृष्टि का दायरा कम होना, पास का या चश्मे का नम्बर बार-बार बदलना। कई बार लाइट के चारों ओर इंद्रधनुषी गोले दिखते हैं।
इलाज
एंटीग्लूकोमा ड्रॉप्स के अलावा लेजर पेरीफेरल आईरिडोटॉमी कर तरल के बहाव के लिए नया छेद बनाते हैं। ट्रैबेक्यूलेक्टॉमी सर्जरी कर तरल के बहाव के लिए नया रास्ता बनाया जाता है। गंभीर अवस्था में ग्लूकोमा वॉल्व प्रत्यारोपण भी करते हैं।
जरूरी जांचें
मधुमेह, मायोपिया, 40 वर्ष से ऊपर के महिला-पुरुष और यदि रोग की फैमिली हिस्ट्री हो तो ये जांचें की जाती हैं-
- टोनोमेट्री : आंख का दबाव देखना
- पेरिमेट्री : नजर के दायरे की जांच
- पेकिमेट्री : पुतली की मोटाई
- फंडोस्कोपी : नस के लिए
- गोनियोस्कोपी : तरल निकलने या बहाव के रास्ते की जांच