रोग और उपचार

Health Tips: जोड़ों के दर्द से राहत दिलाएगी सुबह की मालिश

Health Tips: तन और मन को रिलैक्स करने के लिए भाप स्नान व मालिश से जुड़ा स्पा दर्द दूर करने के साथ कई तकलीफों में राहत देता है।
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Updated: 26 Aug 2021, 12:32 AM IST
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Health Tips: जोड़ों के दर्द से आराम के लिए सुबह खाली पेट मालिश करें । इसकी शुरुआत यूरोपीय देशों से हुई थी जो पूरे विश्व में प्रसिद्धी पा चुका है। स्पा बॉडी मसाज, सोना बाथ, स्टीम बाथ और बॉडी रैप का संयोजन है। बॉडी को रिलैक्स करने, खूबसूरती बढ़ाने में इसका प्रयोग होता है। लेकिन किसी खास रोग में उपचार के तहत स्पा करा रहे हैं तो विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है। इससे अनिद्रा, मोटापा, जोड़दर्द, बाल झडऩा, डिप्रेशन, मुंहासों के अलावा तनाव घटकर रक्तसंचार दुरुस्त होता है।
स्टीम बाथ

इसमें कई जड़ी-बूटियां व गुलाव, चमेली व लैवेंडर जैसी औषधियों के तेलों का प्रयोग होता है। तेल को माथे पर धार बनाकर डालते हैं। नाक, हथेली-हाथों पर भी इसका प्रयोग होता है जिससे थकान, सिरदर्द व तनाव दूर होता है।

उदवर्तनम

यह थैरेपी त्वचा को मुलायम-चमकदार, मांसपेशियों को मजबूत और मेटाबॉलिम दुरुस्त रखती है। स्क्रब के रूप में यह रक्त संचार सुधारकर जोड़ों के दर्द व त्वचा रोगों में लाभ होता है। इस थैरेपी में रोगी के शरीर पर हर्बल पेस्ट लगाने के बाद मसाज और अंत में गुनगुने पानी से स्नान कराते हैं।
स्टीम बाथ

इसमें पानी को उबालकर उससे एक कमरे में भाप पैदा की जाती है। इसमें स्पा लेने वाले व्यक्ति को बैठाते हैं लेकिन बॉडी मूवमेंट की मनाही होती है। इस 30-35 मिनट की प्रक्रिया में स्टीम बाथ से पहले ध्यान रखें कि एक गिलास पानी पीएं। बाथ लेने के दौरान सिर पर या गले के पीछे गीला तौलिया रखें ताकि बेचैनी महसूस न हो।

इसमें औषधियुक्त तेलों से पूरे शरीर पर या दर्द व परेशानी वाले हिस्सों पर मालिश करते हैं। विशेषकर सिर, पैरों के पंजे व सभी अंगों के जोड़। इसमें विशेषज्ञ रोग के कारक (वात-पित्त-कफ) का पता लगाकर उसके अनुसार मेडिकेटेड तेल को चुनते हैं। सुबह खाली पेट यह मसाज मानसिक-शारीरिक दोनों तरह से लाभकारी है। इससे रक्तसंचार दुरुस्त होकर इम्यूनिटी बढ़ती है। जोड़ों की अकडऩ दूर होने से विषैले तत्त्व बाहर निकलते हैं।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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