नवजात शिशु का बीमार होना, ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है...
जन्म के बाद के 2 साल तक किसी भी बच्चे की जिंदगी के सबसे अहम साल होते हैं। दो साल की उम्र तक अधिकतर बच्चे चलना और बोलना सीख जाते हैं। बच्चों को स्वस्थ रखकर माता-पिता उनका बेहतर पालन-पोषण कर सकते हैं। ऐसे समय में बच्चों की सबसे ज्यादा देखरेख जरूरत होती है। सोने से लेकर खाने-पीने व खिलौने आदि को लेकर बेहद सतर्कता बरतने की जररूत होती है। जरा-सी लापरवाही बच्चे की सडन डेथ की वजह बन सकती है।
What is the main cause of SIDS? क्या है सडन डेथ?
एक साल तक के बच्चों की अचानक मौत के लिए सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। कभी-कभी सोते-सोते ही बच्चे की मौत हो जाती है, जिसे कॉट डेथ कहा जाता है। एक माह से एक साल के कई बच्चों की मौत सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम से होती है। इनमें ज्यादातर बच्चे 2-4 महीने के होते हैं।
Why does SIDS happen? क्या करें?
इससे बचने के लिए गर्भावस्था के दौरान मां को पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करना चाहिए, ताकि जन्म के बाद बच्चे को सडन डेथ का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा जन्म के बाद बच्चों को पीठ के बल किसी समतल जगह या गद्दे पर सुलाना चाहिए। बच्चे के सोने की जगह से नर्म, रोएं वाले कंबल व खिलौने दूर रखने चाहिए। बच्चे को नियमित ब्रेस्ट फीड कराना चाहिए। मां का दूध बच्चे को सांस व पेट के इंफेक्शन से बचाता है, जो सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम की मूल वजह है।
SIDS Symptoms ऐसे पहचानें लक्षण...
अगर बच्चे को 100.4 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा फीवर हो, तेज आवाज पर भी प्रतिक्रिया न दे, उसे दस्त हो, दिनभर चार से भी कम बार पेशाब साधारण मानने की गलती न करें। बच्चे के अंबलिक्ल कॉर्ड (नाभि के आसपास) में लाल दाग या पस जमा हो जाए, तो फौरन विशेषज्ञ को दिखाएं। नवजात शिशु का बीमार होना, ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। ऐसे में किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। इन लक्षणों को हल्के में लेने की गलती कतई नहीं करें।