
हाइपोथैलेमिक डिसफंक्शन समस्या में ब्रेन के हाइपोथैलेमस भाग की कार्यक्षमता गड़बड़ाती है। यह भाग पिट्यूटरी ग्लैंड (पीयूष ग्रंथि) को नियंत्रित करता है जो सभी ग्रंथियों में प्रमुख है। यह शरीर के तापमान, नींद, मूड, वजन, प्यास, भूख, प्रजनन, बॉडी क्लॉक आदि को कंट्रोल करती है। हाइपोथैलेमस में खराबी से यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती। एक जैसे लक्षण होने के कारण हाइपोथैलेमस डिसफंक्शनिंग व पिट्यूटरी डिजीज में अंतर करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
हाइपोथैलेमस भाग की गड़बड़ी के लक्षण क्या हैं?
महिलाओं में इससे हाइपोथैलेमिक अमेनोरिया की शिकायत होती है। जिसमें अनियमित माहवारी या प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। साथ ही जीएआरएच हार्मोन का निर्माण कम होने से अंडे बनने व माहवारी पर असर होता है जो इंफर्टिलिटी का कारण है। भूख या प्यास कम-ज्यादा लगना, वजन बढ़ना-घटना, स्वभाव में बदलाव, थकान, शरीर के तापमान में बदलाव इसके लक्षण हैं।
परेशानी के क्या कारण होते हैं?
जन्मजात विकृति, आनुवांशिकता, कोई ट्यूमर या इंफेक्शन, कुपोषण, दिमाग से जुड़ी कोई सर्जरी, खानपान में गड़बड़ी से हाइपोथैलेमस की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। अधिक या कम वजन की महिलाओं में हाइपोथैलेमिक अमीनोरिया होता है।
रोग का इलाज क्या है?
विशेषज्ञ जीवनशैली में सुधार करने, तनाव से दूरी बनाने, व्यायाम कर वजन नियंत्रित रखने की सलाह देते हैं।