रोग और उपचार

बीमारी की पहचान पर संदेह हो तो लेना चाहिए सेकंड ओपिनियन

कई बार 'मेडिकल एरर' की बात निकलकर सामने आती है। डॉक्टर पहले की जांच रिपोर्ट के आधार पर दूसरी बार जांच करा सकते हैं।
less than 1 minute read
• •
Nov 18, 2019
बीमारी की पहचान पर संदेह हो तो लेना चाहिए सेकंड ओपिनियन
If you suspect the identity of the disease, take a second opinion

किसी बीमारी की पहचान होने या किसी जांच रिपोर्ट को लेकर संशय है तो सेकंड ओपिनियन जरूर लेनी चाहिए। कई बार 'मेडिकल एरर' की बात निकलकर सामने आती है। डॉक्टर पहले की जांच रिपोर्ट के आधार पर दूसरी बार जांच करा सकते हैं। कई बार मशीन में तकनीकी समस्या की वजह से भी इस तरह की बात सामने आती है। बीमारी का पता चलने पर घबराने की बजाए चिकित्सक से मिलकर उसका निदान करवाना चाहिए।

इसके साथ ही उसे पूरी बात बतानी चाहिए। कोई नशा करते हैं, कभी कोई बीमारी रही, ऑपरेशन हुआ हो या किसी तरह की एलर्जी या फोबिया है तो जरूर बताएं। पुरानी बीमारी संबंधी जांच रिपोर्ट है तो वह भी दिखाएं। रोगी डॉक्टर से कुछ बातों को छुपा लेते हैं जिसकी वजह से प्रोसीजर या इलाज के दौरान रोगी को बड़ी परेशानी से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे में रोगी से सभी तरह की जानकारी डॉक्टरों को देने की उम्मीद की जाती है। यह डायग्नोसिस से लेकर सटीक इलाज में मददगार होती है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
18 Nov 2019 05:34 pm