रोग और उपचार

चिकित्सक की सलाह के बिना न लें कोई भी दवा, सही तरीका और समय की जानकारी होना भी बेहद जरुरी

Health News: इंटरनेट की दुनिया में आजकल डॉक्टर की जगह लोग सीधे बीमारी का उपचार सर्च करते हैं। कोरोनाकाल में जहां लोगों ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बिना चिकित्सक की सलाह के दवाएं ली हैं। आम पब्लिक को दवाओं के साइड इफेक्ट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती।

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Sep 21, 2021
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Health News: इंटरनेट की दुनिया में आजकल डॉक्टर की जगह लोग सीधे बीमारी का उपचार सर्च करते हैं। कोरोनाकाल में जहां लोगों ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बिना चिकित्सक की सलाह के दवाएं ली हैं। आम पब्लिक को दवाओं के साइड इफेक्ट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। चिकित्सक मरीज की स्थिति देखने के बाद ही दवा का चयन करता है। बुखार और सर्दी जुकाम में लोग अकसर दवा खुद लेते हैं जिससे सेहत को नुकसान होता है। किसी को बार-बार बुखार हो रहा है तो बिना डॉक्टरी सलाह के दवा नहीं लेनी चाहिए। बुखार की दवा गर्मी पैदा करती है। पेट में बार-बार दवा के जाने से पेट में छाले पडऩे और घाव बनने का खतरा रहता है। बच्चों और बुजुर्गों को बिना डॉक्टरी सलाह के बुखार की दवा नहीं देनी चाहिए। जो शराब पीते हैं उन्हें बुखार की दवा बार-बार लेने से बचना चाहिए। इनका लिवर नाजुक होता है जो खराब हो सकता है।

गैस की तकलीफ से गुजर रहे हैं और दवा ले रहे हैं तो हमेशा खाली पेट दवा लेनी चाहिए। ऐसा करने से खाना खाने के बाद एसिडिटी नहीं होती है। शुगर की कुछ दवाएं हमेशा खाना खाने के तुरंत पहले खाई जाती हैं। इससे जब खाना खाएंगे तो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ेगी तो दवा इंसुलिन की मात्रा को आसानी से संतुलित कर लेगी। ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं खाना खाने के एक घंटे बाद लेनी चाहिए। इससे दवा का शरीर में पूरा असर होता है। रक्त प्रवाह भी संतुलित रहता है।

मलेरिया की क्लोरोक्वीन दवा हमेशा खाना खाने के बाद लेनी चाहिए। खाना खाने से पहले इस दवा को खाने से नाक बहने और उल्टी दस्त के साथ कमजोरी की शिकायत हो सकती है।

जुकाम की दवा से आती नींद
सर्दी जुकाम की दवा मनमर्जी से लेने से नींद और चक्कर आने की तकलीफ हो सकती है। काम करना और गाड़ी चलाना मुश्किल होता है।

दवा लेने के कुछ तरीके
ओरल मेडिकेशन: दवा मुंह के जरिए पानी या दूध से लेते हैं। दवा मुंह के बाद पेट में जाती है। फिर छोटी आंत में जाने के बाद रक्त में घुलकर शरीर में फैल जाती है और असर करती है।

इंट्रा विनस: नसों के जरिए रोगी के शरीर के भीतर दवा पहुंचाते हैं। ड्रिप की मदद से भी दवा को रोगी के शरीर में पहुंचाया जाता है। वेंटिलेटर या आइसीयू में भर्ती गंभीर मरीज को इसी तकनीक की मदद से दवा दी जाती है।

Published on:
21 Sept 2021 10:51 pm