रोग और उपचार

#Coronavirus: जानिए कोरोना वायरस से बच्चों को खतरा है या नहीं

राहत की बात यह है कि अब तक के शोधों में सामने आया है कि बच्चों को सामान्य तौर पर कोरोना वायरस से कोई नुकसान नहीं होता है। चिकित्सकों का मानना है कि बच्चे संक्रमण फैलाने के मामले में 'सुपर स्प्रेडर्स' कहलाते हैं, ऐसे में उन्हें सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है

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Apr 05, 2020
#Coronavirus: जानिए कोरोना वायरस से बच्चों को खतरा है या नहीं
Know how much children are at risk from coronavirus

नोवेल कोरोना वायरस के बारे में अभी हमें ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन हालिया शोध बताते हैं कि यह तेजी से फैलने के कारण ज्यादा घातक है। हालांकि शोध में यह भी सामने आया है कि बच्चे अभी इससे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं। लेकिन अभिभावक होने के नाते माता-पिता का इस महामारी के समय अपने बच्चों के प्रति चिंतित होना सामान्य है। इंसान की प्रवृत्ति उसे बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार संवेदनशील बनाए रखती है। बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ विकसित और मजबूत होती है इसलिए बच्चों को कोरोना संक्रमण के समय संक्रमित होने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। राहत की बात यह है कि अब तक के शोधों में सामने आया है कि बच्चों को सामान्य तौर पर कोरोना वायरस से कोई नुकसान नहीं होता है।

शोध में बच्चों पर खास असर नहीं-
हाल ही अमरीकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में कोविड-19 के पुष्टि या संदिग्ध मामलों वाले दो हजार से अधिक बच्चों की जांच की गई थी। इन बच्चों को 16 जनवरी से 8 फरवरी के बीच चीन के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र में आइसोलेशन में रखा गया था। इन 2143 बच्चों में से 90 फीसदी बच्चों में या तो कोई लक्षण नहीं थे या केवल हल्का बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, गले में खराश, नाक बहने और छींकने, निमोनिया के साथ लगातार बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ के लक्षण थे। इन बच्चों को बिना किसी जटिलता के सामान्य फ्लू के इलाज से ही ठीक कर लिया गया था। इलाज के दौरान सभी उम्र के बच्चों में कोरोनावायरस के प्रति अतिसंवेदनशील पाया गया था लेकिन ऐसा किसी भी संक्रामक बीमारी में सामान्य है।

शोध के दौरा 4 फीसदी बच्चों में कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए। केवल 6 फीसदी यानि 2143 में से 125 बच्चों में ही अधिक गंभीर लक्षण पाए गए। केवल 14 वर्षीय एक बच्चे की मौत हुई। यह अब तक का सबसे बड़ा अध्ययन है जो हमें बच्चों में कोरोनावायरस के प्रसार की व्यापक जानकारी देता है। डेटा से पता चलता है कि 19 वर्ष से कम आयु के लोगों में कोरोना वायरस की गंभीर जटिलताएं बहुत कम हैं।
हालांकि बच्चे अगर संक्रमित हैं तो वे रोग के सबसे संवेदनशील वाहक बन सकते हैं क्योंकि वे घर के हर सदस्य के संपर्क मेंं आते हैं।

Published on:
05 Apr 2020 05:54 pm