
आर्थराइटिस वैसे तो करीब 100 तरह का होता है लेकिन मूल रूप से ये दो तरह का का होता है। ओस्टियो-आर्थराइटिस में शरीर का वजन संभालने वाले जोड़ों जैसे कूल्हे, कमर (मेरुदण्ड) और घुटनों में जकडऩ, दर्द और सूजन की समस्या होती है जबकि रुमेटाइड आर्थराइटिस में हाथों, कलाइयों और कोहनियों जैसे नाजुक जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। आर्थराइटिस को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं, जिनका निदान जरूरी है। जानते हैं इससे जुड़े भ्रम और सच-
भ्रम : बढ़ती उम्र का रोग है आर्थराइटिस
सच : उम्र बढऩे पर इस रोग के बढऩे की आशंका बढ़ जाती है लेकिन यह सिर्फ वृद्धावस्था में ही होता है, यह जरूरी नहीं। युवाओं में भी इसके मामले देखने को मिलते हैं।
मिथ : एक्स-रे से आर्थराइटिस का पता चल जाता है।
सच : एक्स-रे आर्थराइटिस के मामले में भरोसेमंद टेस्ट नहीं माना जा सकता। कई बार मरीज दर्द की शिकायत करता है फिर भी एक्सरे में कुछ नहीं सामने आता इसलिए इसके लक्षणों व दूसरी जांचों पर ही भरोसा करना चाहिए।
मिथ : सिरका पीने से दर्द कम होता है ।
सच : यह बात गलत है। इससे न तो दर्द कम होता है और न ही रक्त का पीएच लेवल बदल सकता है।
मिथ : गर्म और शुष्क मौसम में आर्थराइटिस की समस्या नहीं होती।
सच : हो सकता है कि गर्म और शुष्क मौसम में आपको लक्षणों में कुछ राहत मिल जाए लेकिन शोध बताते हैं कि जल्दी ही ये लक्षण फिर से सामने आते हैं।
मिथ : अंगुलिया चटकाने से आर्थराइटिस होता है।
सच : शोध में भी ऐसा नहीं पाया गया है। इससे सिर्फ जोड़ों के बीच मौजूद लिक्विड की गैस रीलीज होने पर आवाज आती है बशर्ते जबरदस्ती न दबाया जाए।