
लिवर, शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका वजन करीब डेढ़ किलो तक होता है। यह शरीर का मल्टीपल फंक्शन ऑर्गन है जो कि शरीर में पोषक तत्वों को मेटाबोलाइज करने, वसा का भंडारण करने, पाचन में सहायक पित्तरस का उत्पादन करने और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखता है। हमारी जीवनशैली इस अंग को प्रभावित करती है। इसकी वजह से युवाओं में लिवर रोग की समस्या बढ़ रही है। लिवर सही तरह से काम कर रहा है या नहीं, इस बारे में जागरूक होना जरूरी है।
लिवर रोग...खामोश रोग
आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने में लिवर की भूमिका को अहम माना गया है। लिवर रोग बड़ी खामोशी के साथ आते हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर में बढ़ रही होती है। उन्हें शुरुआती लक्षणों के आधार पर पहचान नहीं सकते हैं। लिवर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
जानिए जोखिम कारक
अल्कोहल, मोटापा, डायबिटीज, टैटू या बॉडी पियर्सिंग, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित लोगों के रक्त और शारीरिक तरल के सम्पर्क में आना आदि।
इसके रोगों के प्रकार
पीलिया : इस रोग की वजह से शरीर का रंग पीला दिखने लगते हैं। नाखून में पीलापन और आंखें पीली दिखना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
हेपेटाइटिस: यह वायरस के कारण होता है। यह पांच तरह का है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई। इनमें से कुछ अल्पकालिक हैं।
लिवर कैंसर: लिवर में जब कैंसर का टिशू बन जाता है तो उसे लिवर कैंसर कहते हैं। इसमें हिपेटोसेलुलर कार्सिनोमा प्रमुख है।
फैटी लिवर: लिवर में वसा का अत्यधिक संग्रहण फैटी लिवर का कारण बनता है। यह मुख्यत: दो तरह का होता है, अल्कोहॉलिक फैटी लिवर व नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर।
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लिवर फाइब्रोसिस: जब लिवर में फैट जमा होता है तो वह लिवर को खराब भी करता है। इसे स्कारिंग भी कहते हैं। लिवर सामान्य की तुलना में कड़ा होता जाता है।
लिवर सिरोसिस: लिवर के सिकुडऩे से लिवर सिरोसिस की समस्या होती है। लिवर सिरोसिस का मुख्य कारण हेपेटाइटिस बी और सी, जंक फूड्स का सेवन होता है।
ध्यान देने योग्य बातें
आर्टिफिशियल शुगर व सॉफ्ट ड्रिंक्स से बचें: सॉफ्ट ड्रिंक्स में शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। वहीं आर्टिफिशियल शुगर में सुक्रोज होता है जो शरीर में जाने के बाद 50 फीसदी ग्लूकोज और 50 फीसदी फ्रुक्टोज में बदलता है। फ्रुक्टोज लिवर में जाकर वसा के रूप में इक_ा होता है। एक व्यक्ति को अधिकतम 25-30 ग्राम (5-6 चम्मच) तक चीनी खाना चाहिए।
सप्लीमेंट्स के प्रयोग से बचें: युवा अक्सर जिम में जाकर एक्सरसाइज करते हैं। उनमें मसल्स बनाने का क्रेज भी अधिक होता है। जिम में उन्हें सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है। इन सप्लीमेंट्स में स्टिरॉइड्स का उपयोग किया जाता है। मसल्स तो बन जाते हैं, लेकिन यह नुकसानदेह होते हैं।
नई ब्लेड का उपयोग करने को कहें: सैलून में अक्सर देखा जाता है कि इस्तेमाल की गई ब्लेड का उपयोग एक से अधिक व्यक्तियों पर किया जाता है। इस्तेमाल की गई ब्लेड भी हेपेटाइटिस जैसा रोग होने का कारण बनती हैं।
अल्ट्रासाउंड जरूर कराएं: मोटापे और डायबिटीज से ग्रसित मरीजों में फैटी लिवर की समस्या अधिक देखी जाती है। इसलिए इन मरीजों को अल्ट्रासाउंड के जरिए लिवर में फैट के जमा होने की स्थिति और लिवर फंक्शन टेस्ट अवश्य कराने चाहिए।