रोग और उपचार

Male Infertility: इस गड़बड़ी से पुरुषों में हो सकती है शुक्राणुओं की कमी

Male Infertility: इन दिनों ऐसे पुरुषों की संख्या अधिक है जिनके शुक्राणुओं की गणना कम है। यानी उनकी सीमेन जांच में कोई स्वस्थ शुक्राणु नहीं दिखते। कई बार शुक्राणु टेस्टीज में बन रहे होते हैं, लेकिन ट्यूब बंद होने की वजह से ये सीमेन में सम्मिलित नहीं हो पाते

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Sep 28, 2019
Male Infertility: इस गड़बड़ी से पुरुषों में हो सकती है शुक्राणुओं की कमी

Male Infertility: इन दिनों ऐसे पुरुषों की संख्या अधिक है जिनके शुक्राणुओं की गणना कम है। यानी उनकी सीमेन जांच में कोई स्वस्थ शुक्राणु नहीं दिखते। कई बार शुक्राणु टेस्टीज में बन रहे होते हैं, लेकिन ट्यूब बंद होने की वजह से ये सीमेन में सम्मिलित नहीं हो पाते। वेरिकोसील रोग के कारण भी शुक्राणु नहीं बन पाते। मूल जटिलता उस स्थिति में होती है जब पुरुष में शुक्राणु ही नहीं बन पाते या उसके सीमेन के सेम्पल में शुक्राणु पाए ही नहीं जाते। यह स्थिति आजुस्पर्मिया ( Azoospermia ) है। एक प्रतिशत जनसंख्या इसका शिकार है।

समस्या के अन्य मुख्य कारण क्या हैं? ( Male Infertility Cause )
इसके कई कारण हैं जिसमें हार्मोन्स की कमी, बचपन से ही टेस्टीज में इंफेक्शन या चोट लगना, स्मोकिंग व शराब पीने की लत मुख्य हैं। कई बार बॉडी बिल्डिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाले स्टेरॉइड से भी आगे चलकर शुक्राणुओं के बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। जरूरत से ज्यादा व्यायाम करने से भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर दुष्प्रभाव पड़ता है। अत्यधिक तनाव, चिंता, प्रदूषण, खून की कमी आदि से भी यह दिक्कत होती है।

परेशानी का उपचार क्या है? ( Male Infertility Treatment )
कई नए उपचारों से पुरुषों में इंफर्टिलिटी की समस्या दूर की जाती है। शुक्राणु की कम गणना ओलिगोस्पर्मिया और न के बराबर गणना आजुस्पर्मिया कहलाती है। सीमेन का एक सेम्पल जांच के लिए लेकर उसमें शुक्राणुओं की गणना, गुणवत्ता, आकार का पता लगाते हैं। स्टेम सेल तकनीक से शुक्राणुओं को लैब में विकसित कर महिला के अंडे के साथ सम्मिलित कर उसके गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिए जाते हैं।

Published on:
28 Sept 2019 12:29 pm
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