
कभी भी अपने मन से दवा न लें। दवा खून से पूरे शरीर में पहुंचती है जिससे बड़ी परेशानी हो सकती है। बच्चों को बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न दें।
दवाओं के इस्तेमाल को लेकर बरती गई लापरवाही स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के साथ शरीर की उस बीमार कोशिका के आसपास के हिस्सों को भी नुकसान पहुंचाती हैं। लंबे समय से किसी बीमारी की दवा चल रही है तो उसे डॉक्टरी सलाह पर बदलते रहें क्योंकि एक तरह की दवा बॉडी फ्रेंडली हो जाती है जिस वजह से रोगग्रस्त कोशिका पर उसका असर नहीं होता है। दवा लेने के समय में किसी तरह का हेरफेर बीमारी को ठीक करने की बजाए रोगी की परेशानी को बढ़ा देता है। दवा खाने के बाद डॉक्टरी सलाह पर योग और अन्य तरह की एक्सरसाइज करने से शरीर में उसके कार्य करने की क्षमता अधिक तेज होती है। बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न लें।
सावधानी है जरूरी -
दवा खाने के साथ उसके रखरखाव में किसी भी तरह की लापरवाही बड़ी समस्या का कारण है। दवा डॉक्टर द्वारा बताए गए तय समय पर ही खानी चाहिए।