Munawar Faruqui Son Diagnosed with Kawasaki Disease : स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उनके बेटे को कावासाकी बीमारी हो गई थी। उन्होंने यूट्यूब के पॉडकास्ट 'सोशल मीडिया स्टार विद जेनिस' में इस बीमारी के बारे में खुलकर बात की।
Munawar Faruqui Son Diagnosed with Kawasaki Disease : स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि उनके बेटे को कावासाकी (Kawasaki disease) नामक बीमारी हो गई थी। इस बीमारी से जुड़ी जानकारी के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में।
कावासाकी बीमारी (Kawasaki disease) एक फेब्राइल यानी बुखार वाली बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है, खासकर एक साल से कम उम्र या एक से दो साल के बच्चों में। यह बीमारी दिल की धमनियों को प्रभावित करती है, जिससे खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यह बीमारी सबसे पहले जापान, चीन और कोरिया में पाई गई थी, लेकिन अब यह दुनिया भर में फैल चुकी है। भारत में इसके मामलों की संख्या के बारे में कोई ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
कावासाकी बीमारी (Kawasaki disease) के लक्षणों में बुखार, मुंह में छाले, हाथ-पैरों में सूजन, आंखों का लाल होना, गले में गांठें, होठों का फटना, और चमड़ी का उतरना जैसे संकेत शामिल हो सकते हैं। ये लक्षण आमतौर पर बुखार के साथ एक साथ आते हैं, और अगर ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक होता है।
कावासाकी बीमारी के इलाज के लिए आमतौर पर आईवीआईजी (इंट्रावेन्सस इम्यूनोग्लोबुलिन) का उपयोग किया जाता है, जो इंसानों के सीरम से तैयार होता है। यह इलाज कोरोनरी आर्टरी में सूजन और खून के थक्कों से बचने के लिए किया जाता है, ताकि दिल पर असर न हो और मरीज की हालत बिगड़ने से बचाई जा सके।
कावासाकी बीमारी (Kawasaki disease) के इलाज में कुछ बच्चों को सामान्य आईवीआईजी से ठीक नहीं मिलता, ऐसे मामलों को रेजिस्टेंट कावासाकी कहा जाता है, और इसके लिए दोबारा आईवीआईजी दिया जाता है। यह बीमारी बच्चों को दिल की बीमारी और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं से भी जूझवा सकती है।
कावासाकी बीमारी एक दुर्लभ और गंभीर रोग है, जो बच्चों को प्रभावित करता है। मुनव्वर फ़ारूक़ी की कहानी ने इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने का काम किया है। यह बीमारी सही समय पर इलाज मिलने पर ठीक हो सकती है, लेकिन इसकी पहचान और इलाज में कोई देर नहीं करनी चाहिए।