रोग और उपचार

बढ़ती उम्र के साथ होती है हड्डियों से जुड़ी ये समस्या

भारत में बढ़ी संख्या में लोग ऑस्टियो-पोरोसिस से परेशान हैं। बढ़ती उम्र के साथ उनमें बोन मिनिरल डेंसिटी भी घट रही है।

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Nov 09, 2019
बढ़ती उम्र के साथ होती है हड्डियों से जुड़ी ये समस्या
osteoporosis causes symptoms and treatment

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?

भारत में बढ़ी संख्या में लोग ऑस्टियो-पोरोसिस से परेशान हैं। बढ़ती उम्र के साथ उनमें बोन मिनिरल डेंसिटी भी घट रही है। इस कारण हड्डियों में फ्रैक्चर का रिस्क बढ़ रहा है, खासकर स्पाइन में। हालांकि हड्डियों में कमजोरी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बुजुर्गों में ज्यादा दिक्कत होती है। कंप्रेशन फ्रैक्चर तब होता है जब स्पाइन की कमजोर हड्डी क्षतिग्रस्त हो जाती है। इससे बैक पेन रहने लगता है।

वर्टिब्रोप्लास्टी क्या है?
स्पाइन के ज्यादातर फ्रैक्चर को ठीक करने से पहले बैड रेस्ट कराते हैं ताकि दर्द पूरी तरह से खत्म हो जाए। दर्द निवारक दवाएं, बैक ब्रेसेस और फिजिकल थैरेपी भी दी जा सकती है। कभी-कभी मरीज की स्पाइन को तत्काल बचाने के लिए सर्जरी की जाती है। इसमें बोन ग्राफ्ट या इंटरनल मेटल डिवाइस की मदद ली जाती है। हाल ही नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट का प्रयोग किया गया है जिसे वर्टिब्रोप्लास्टी कहते हैं। यह खासकर उन मरीजों के लिए अच्छा विकल्प है जिन्हें बेड रेस्ट, एनालजेसिक्स और बैक ब्रेसिंग देने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है। इसमें मेडिकल ग्रेड सीमेंट को निडि़ल के माध्यम से दर्द वाले हिस्से में इंजेक्ट करते हैं। इसकी मदद से मरीज अपने रोजमर्रा के काम निपटा सकता है।

क्या इससे आराम मिलता?
वर्टिब्रोप्लास्टी के बाद कई मरीजों को दर्द से राहत मिली है। ज्यादातर मामलों में इस प्रक्रिया के बाद दर्द दूर हुआ। वर्टिब्रोप्लास्टी काफी सेफ है। क्षतिग्रस्त हड्डियों को जोड़ने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बोन सीमेंट भी सेफ है।

खानपान कैसा हो
हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, दालें, फल, ब्रोकली खानपान में शामिल करें। कोल्ड ड्रिंक व कॉफी कम करें। मांस ज्यादा न खाएं। हल्की धूप में 15 मिनट रहें। इससे शरीर में विटामिन डी का लेवल बढ़ेगा।

Published on:
09 Nov 2019 02:28 pm