रोग और उपचार

प्रेग्नेंसी में हाइ बीपी की समस्या से बढ़ता प्री-मैच्योर बेबी का खतरा

30-40% गर्भवती महिलाओं में हाइ ब्लड प्रेशर की तकलीफ होती है, 2.5-3 किलो वजन होता है जन्म के समय स्वस्थ शिशु का। गर्भपात या गर्भस्थ शिशु को बे्रन स्ट्रोक हो सकता है।

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Nov 09, 2019
प्रेग्नेंसी में हाइ बीपी की समस्या से बढ़ता प्री-मैच्योर बेबी का खतरा
premature baby care

गर्भावस्था के चौथे से छठे माह में ज्यादातर हाइ ब्लड प्रेशर की दिक्कत होती है। इस दौरान शरीर में तेजी से कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। इस वजह से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं। अचानक ब्लड प्रेशर तेज होने से बच्चे के शरीर में पहुंचने वाले रक्त की भी गति तेज हो जाती है। ऐसे में गर्भपात हो सकता है। गर्भ के भीतर बच्चे को ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर अचानक बढ़े तो नजरअंदाज न करें। जच्चा-बच्चा की जान को खतरा हो सकता है। इसको नियंत्रित करने के लिए इलाज जरूरी है।

जरूरी पोषक तत्त्व नहीं मिलते -
ऐसी स्थिति में गर्भस्थ शिशु को जरूरी पोषक तत्त्वों कैल्शियम, शुगर और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में नहीं मिलता है। इससे विकास बाधित होता है। यह स्थिति जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। बीपी नियंत्रित नहीं होने पर चिकित्सक गर्भस्थ शिशु को ऑपरेशन कर निकाल लेते हैं।

सात साल तक बच्चे की जांच -
इसके बाद नवजात को लंबे समय तक आइसीयू में रखते हैं। जन्म के दो हफ्ते बाद तक लगातार यूरिन जांच होती है, जिससे अंदरूनी संक्रमण का पता चल सके। सात साल तक हर तीन माह में जरूरी जांचें होती हैं। हड्डियों के विकास पर अधिक ध्यान देते हैं क्योंकि लंबाई उसी पर आधारित है। आंखों, किडनी, लिवर, हार्ट व फेफड़ों की स्थिति जानने के लिए जांचें होती हैं। सात साल की उम्र के बाद अठारह साल तक साल में एक बार पूरे शरीर की जांच करानी चाहिए।

नमक कम लें -
पैक्ड फूड न खाएं, प्रिजर्वेटिव सुस्ती व कमजोरी ला सकते हैं। कम नमक प्रयोग करें।
फास्टफूड, तली भुनी चीजें न खाएं, इसके केमिकल्स रक्त प्रवाह को गड़बड़ाते हैं।

एक माह में एक किलो तक बढ़े वजन-
प्री-मैच्योर बेबी का एक माह में 800 ग्राम से लेकर एक किलो के बीच वजन बढ़ना चाहिए। हफ्ते में 100 ग्राम बढ़ना हर हाल में जरूरी है। यदि बच्चे का वजन इस अनुपात में नहीं बढ़ता है तो इसका असर उसकी ग्रोथ पर पड़ सकता है। बच्चे को जरूरी दवाएं देने के साथ मदर फीडिंग पर ध्यान देना चाहिए। मां को भी प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स युक्त आहार लेना चाहिए। मां की सेहत बढ़ियां रहेगी तो बच्चे की अच्छी ग्रोथ होगी।

Published on:
09 Nov 2019 02:53 pm