रोग और उपचार

ल्यूकीमिया में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट प्रभावी

ल्यूकीमिया यानी ब्लड कैंसर का ट्यूमर धीरे-धीरे रक्त कोशिकाओं में फैलता है

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Jul 06, 2019
Leukemia
ल्यूकीमिया में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट प्रभावी

ल्यूकीमिया यानी ब्लड कैंसर का ट्यूमर धीरे-धीरे रक्त कोशिकाओं में फैलता है। इसकी शुरुआत हड्डियों में मौजूद नाजुक ऊत्तकों बोनमैरो से होती है। इनके बढऩे से श्वेत रुधिर कणिकाओं की संख्या भी अनियमित रूप से बढऩे लगती हैं जो ब्लड कैंसर का कारण बनती है। यह तीन प्रकार का होता है-ल्यूकीमिया, लिम्फोमा व मल्टीपल मायलोमा। स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से इसका इलाज संभव हो गया है।

लक्षण : हड्डियों व जोड़ों में तेज दर्द
नाक से खून आना, शारीरिक कमजोरी, तेज बुखार के साथ ठंड लगना, हड्डियों व जोड़ों में तेज दर्द, कम शारीरिक गतिविधि के बावजूद अधिक थकान, कान के पास गिल्टियों में सूजन व रात में सोते समय पसीना आना।

आशंका : इन्हें ज्यादा खतरा
ज्यादातर मामलों में वजह अज्ञात है। लेकिन कुछ मरीजों में बेंजीन कैमिकल वाली चीजों (डाई, डिटर्जेंट, दवा) के ज्यादा संपर्क में आने, धूम्रपान, पहले से कैंसर का इलाज लेने या फैमिली हिस्ट्री हो तो भी यह हो सकता है।

फैलाव
बोनमैरो में बनने वाली श्वेत व लाल रक्त कणिकाओं में यदि कैंसर ट्यूमर बनते हैं तो रक्तसंचार के दौरान ये फैलने लगते हैं। ब्लड कैंसर की शुरुआती स्टेज में कैंसर ट्यूमर एक जगह बढ़ता है लेकिन इलाज के अभाव में ये रक्त में मिलकर अन्य अंगों की स्वस्थ कोशिकाओं से जुड़कर फैलने लगते हैं।

जांच
सीबीसी (कम्प्लीट ब्लड काउंट) जांच कर रोग का पता लगाते हैं। बोनमैरो बायोप्सी करके भी रोग की पहचान करते हैं।

ध्यान रखें
समय से उठें, सोएं व प्रोटीनयुक्त डाइट लें। रोज एक घंटा वॉक जरूर करें ताकि शरीर एक्टिव बना रहे व थकान की स्थिति न बने। पानी भरपूर पीएं। अतिरिक्त नमक न लें।

इलाज : प्रकार व फैलाव के आधार पर इलाज करते हैं।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन : इसके तहत मरीज के सगे भाई या बहन का ब्लड टैस्ट करते हैं। दाता स्वस्थ मिलने पर उसके शरीर से 200 एमएल रक्त निकालकर उसमें से श्वेत रक्त कणिकाओं को अलग कर मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट कर देते हैं। यदि दाता अस्वस्थ पाया जाता है तो बोनमैरो के अलावा अन्य प्रमुख जांचें की जाती हैं।

कीमोथैरेपी : कैंसर सेल्स का असर घटाने के लिए एंटीकैंसरस दवाएं दी जाती हैं। कई बार स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन के बाद भी कीमोथैरेपी दी जाती है।

रेडिएशन थैरेपी: इसमें कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को रेडिएशन देकर नष्ट करते हैं। स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन के बाद भी इसकी मदद ली जाती है।

Updated on:
05 Jul 2019 05:02 pm
Published on:
06 Jul 2019 09:00 am