
गर्भावस्था में यदि महिला को टीबी होती है तो सवाल उठता है कि कहीं बच्चे को तो टीबी नहीं हो जाएगी।महिला बे्रस्टफीड करा पाएगी या नहीं। यदि ब्रेस्ट में टीबी की गांठ पाई जाती है तो उसे ब्रेस्टफीडिंग कराने से मना करते हैं। यदि किसी अन्य अंग में टीबी है तो ब्रेस्टफीडिंग में दिक्कत नहीं आती है।टीबी का बैक्टीरिया यदि गर्भाशय तक पहुंच जाए तो गर्भस्थ शिशु को बीमारी की आशंका रहती है।
शिशु को बीमारी से बचाना
प्रेग्नेंसी के दौरान टीबी होने पर बार-बार खांसी, वजन घटने व बुखार आने जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत इलाज लें। इसके लिए बलगम की जांच से रोग की पुष्टि होने के बाद इलाज के रूप में दवाएं देते हैं। रोग की पहचान न होने पर गर्भ को सुरक्षित रखते हुए पेट व आसपास के हिस्से को शीट से ढककर एक्सरे करते हैं ताकि शिशु काे कोई नुकसान न पहुंचे।समय पर इलाज लेने से टीबी का खतरा कम हाे जाता है।