रोग और उपचार

तनाव, अधिक बीपी और शुगर से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

तनाव से बढ़ा ब्लड प्रेशर, अधिक शुगर लेवल व धूम्रपान करने वालों को यह ज्यादा होता है। यह वंशानुगत भी हो सकता है।
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Oct 28, 2017
Increasing brain stroke in youth
Increasing brain stroke in youth

ब्रेन स्ट्रोक (ब्रेन अटैक) के मामले इन दिनों काफी बढ़ गए हैं। मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण माना जाने वाला स्ट्रोक दुनियाभर में अपंगता के प्रमुख कारणों में से एक है। आंकड़ों के अनुसार हर 6 सेकंड में एक व्यक्ति की इससे मृत्यु हो जाती है।

क्या है ब्रेन स्ट्रोक?
ब्रेन स्ट्रोक का नाम ब्रेन अटैक इसलिए दिया क्योंकि इसके लक्षण अचानक सामने आते हैं जो जानलेवा हो सकते हैं। यह दो प्रकार का है। पहला, दिमाग तक जाने वाली रक्तधमनियों में थक्का जमना। इसे सेरेब्रल इंफाक्र्ट कहते हैं जिसके 85 फीसदी मामले दिखते हैं। दूसरा, ब्रेन हेमरेज, जिसमें रक्तधमनी के फटने से रक्त दिमाग में जम जाता है। इसके 15 फीसदी मामले सामने आते हैं।

हर वर्ष मनाए जाने वाले वल्र्ड स्ट्रोक डे की थीम इस वर्ष 'वॉट्स योर रीजन फॉर प्रिवेंटिंग स्ट्रोक यानी स्ट्रोक से बचाव के लिए आपमें क्या कारण है, रखी गई है। सामान्यत: इस रोग की शिकायत 60 से अधिक उम्र वालों को होती है लेकिन इन दिनों युवाओं में भी इस रोग की शिकायत है।

कारण
तनाव से बढ़ा ब्लड प्रेशर, अधिक शुगर लेवल व धूम्रपान करने वालों को यह ज्यादा होता है। यह वंशानुगत भी हो सकता है। अधिक कोलेस्ट्रॉल, वजन, जंकफूड ज्यादा खाना और अव्यवस्थित जीवनशैली भी वजह हैं। जिन बच्चों की रक्तधमनी में जन्मजात विकृति हो उन्हें भी यह हो सकता है। खून पतला करने वाली दवा लेने वाले और थैलेसीमिया के रोगियों को इसकी आशंका रहती है।

लक्षण
शरीर के एक तरफ लकवे से कमजोरी, चेहरा टेढ़ा होना, बोलने, देखने व चलने में दिक्कत प्रमुख है। अचानक सिर में तेज दर्द व बेहोशी छाना। कई बार 5-10 मिनट के लिए बोलने, चलने व देखने में तकलीफ होना या लकवा आना बड़े ब्रेन अटैक की ओर इशारा करता है। यह स्थिति ट्रांस्जेंट इस्कीमिक अटैक (टीआईए) की है।

ऐसे होता इलाज
टीआईए की स्थिति में तुरंत एस्प्रिन दवा देने के बाद रोगी को अस्पताल ले जाएं। इलाज के रूप में उसे अटैक आने के साढ़े चार घंटे में अस्पताल लाना अनिवार्य है। रोगी को टिश्यू प्लाज्मिनोजन एक्टीवेटर्स (टीपीए) दवा देते हैं। गंभीर स्थिति में रोगी को 6 घंटे के अंदर अस्पताल लाकर रक्तधमनी में स्टेंट डालकर थक्के को निकालते हैं। नए उपचार के रूप में ब्रेन हेमरेज के दौरान एन्यूरिज्म की स्थिति बनने पर छल्ला डालकर इसे बंद कर देते हैं। कई बार फिजियोथैरेपी की मदद भी ली जाती है।

बचाव...
ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और वजन को कंट्रोल करें।
धूम्रपान न करें व तनाव न लें।
डॉ. त्रिलोचन श्रीवास्तव
प्रोफेसर, न्यूरोलॉजी विभाग,
एसएमएस अस्पताल, जयपुर

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
28 Oct 2017 11:04 am