
Prevention of monsoon Diseases: बरसात में मौसम में मच्छर बढऩे और पानी दूषित होने से कई बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इनमें मलेरिया, डेंगू, टायफाइड, हेपेटाइटिस, हैजा आदि शामिल हैं। जानते हैं इन रोगों और उनसे कैसे बचाव कर सकते हैं, इसके बारे में जानते हैं।
डेंगू
बारिश में पानी भरा होने से मच्छर तेजी से पनपते हैं। एडीज नामक मच्छर के काटने से डेंगू होता है।
लक्षण: ठंड के साथ तेज बुखार और सिर, आंखों के पीछे, जोड़ों व मांस-पेशियों में तेज दर्द, थकान, मितली, उल्टी, त्वचा पर लाल चकत्ते एवं भूख न लगना जैसे लक्षण दिखते हैं। त्वचा व शरीर के अन्य हिस्सों में ब्लीडिंग स्पॉट पडऩे लगते हैं एवं ब्लड प्लाज्मा से रिसाव होने लगता है। गंभीर होने पर फेफड़े, लिवर या दिल को भी नुकसान हो सकता है। बीपी खतरनाक स्तर पर नीचे जा सकता है। कुछ मामलों में मृत्यु की आशंका रहती है।
मलेरिया
यह भी मच्छरों से होने वाली बीमारी है। यह मादा एनाफिलीज नामक मच्छर के काटने से होती है।
लक्षण: ठंड के साथ बुखार, सिर दर्द, उल्टी, जी मिचलाना, कई बार स्टूल से खून आना, मांसपेशियों में दर्द, चक्कर आना आदि।
चिकनगुनिया
बरसात में चिकनगुनिया के मामले बढ़ जाते हैं। यह भी मच्छरजनित है। इसमें मच्छर के काटने के 10-12 दिन बाद लक्षण दिखाई देते हैं।
लक्षण: अचानक तेज बुखार (आमतौर पर 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ऊपर), सिर, जोड़ों-हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द, आंखों से पानी आना, त्वचा पर लाल निशान, मितली व उल्टी का मन, आर्थराइटिस जैसे लक्षण आदि।
बचाव के तरीके
शरीर को पूरी तरह से ढककर रखें। दरवाजे व खिड़कियों को बंद रखें। मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। बच्चों को बाहर भेजते समय दस्ताने व पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। घरों के आसपास साफ-सफाई रखें। कूलर, टैंक, ड्रम, बाल्टी में पानी हो तो ढककर रखें। घर के चारों ओर जलभराव न हो। जहां हो, वहां कैरोसिन का छिडक़ाव करें। घर में गमले हों तो उनमें मच्छर न पनपने दें।
इनका रखें ध्यान
दूषित पानी व बासी भोजन से बचें। ज्यादा तैलीय खाना न खाएं। हाइजीन का विशेष ध्यान रखें। कच्ची चीजें खाने से बचें। सलाद हल्का उबालकर लें। बारिश के चलते पीने का भी पानी कई बार दूषित हो जाता है। इसके लिए पानी उबालकर भी पी सकते हैं।