रोग और उपचार

बीसीएस : बे्रस्ट को हटाने की बजाय सिर्फ ट्यूमर किया जाता है अलग

ब्रेस्ट में गांठ, निप्पल के आकार व त्वचा में बदलाव, इनमें से पानी निकलना या दर्द रहना इसके लक्षण हैं

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Jul 09, 2019
breast cancer
बीसीएस : बे्रस्ट को हटाने की बजाय सिर्फ ट्यूमर किया जाता है अलग

विभिन्न महिलाओं में बे्रस्ट कैंसर के अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं। ब्रेस्ट में गांठ, निप्पल के आकार व त्वचा में बदलाव, इनमें से पानी निकलना या दर्द रहना इसके लक्षण हैं। इनसे घबराने की बजाय लक्षणों के दिखते ही विशेषज्ञ से सलाह लें। इस रोग से जुड़े कई ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं। इनमें से एक है बे्रस्ट कंजर्वेशन सर्जरी (बीसीएस)। इसके तहत पूरे बे्रस्ट को हटाने की बजाय केवल ट्यूमर हो हटाया जाता है। यह इलाज मेट्रो शहरों में उपलब्ध है।

जांच : चालीस साल की हर महिला को साल में एक बार डिजिटल मेमोग्राफी करानी चाहिए। यह एक प्रकार की एक्स-रे जांच है जिससे प्रारंभिक अवस्था में ही कैंसर का पता लगाया जा सकता है।

कब करते सर्जरी
बे्रस्ट कंजर्वेशन सर्जरी में लम्पेक्टॉमी व पार्शियल मास्टेक्टॉमी तकनीकों को अपनाते हैं। लम्पेक्टॉमी बे्रस्ट कैंसर की शुरुआती यानी पहली स्टेज में करते हैं। मैमोग्राफी रिपोर्ट देखने के बाद ट्यूमर वाले हिस्से को निकालकर ब्रेस्ट रेडियोथैरेपी दी जाती है। इसे मरीज की स्थिति के अनुसार कुछ हफ्तों तक देते हैं। ट्रीटमेंट के बाद उसी हिस्से में यदि दोबारा ट्यूमर पाया जाता है तो मास्टेकटॉमी करते हैं।


गांवों में बढ़ रहे मामले
देश में हर साल स्तन कैंसर के 1.3 लाख से अधिक मामले सामने आते हैं। शहरों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में दूसरा सबसे आम कैंसर है। यह भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का पांचवां प्रमुख कारण है। द पिंक इनीशिएटिव के शोध के अनुसार, बे्रस्ट कैंसर रोगियों में से लगभग आधे रोगी 50 साल से कम उम्र के हैं।

रेडिकल मास्टेकटॉमी से अधिक कारगर बीसीएस
ऐसे कैंसर के इलाज में की जाने वाली रेडिकल मास्टेकटॉमी (बे्रस्ट को पूरी तरह हटाना) में ट्यूमर की पुष्टि होने पर पूरा बे्रस्ट हटाने पर जोर दिया जाता था। लेकिन इन दिनों बीसीएस सर्जरी काफी कारगर साबित हो रही है।

Published on:
09 Jul 2019 01:55 pm