
गर्भावस्था में कितनी बार तक उल्टी होना सामान्य माना जाता है ?
20 से 25 उल्टी अगर महिला को हो रही है और उल्टी में 2-3 बार ही सॉलिड फूड निकल रहा है तो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उल्टी में अधिक मात्रा में फूड बाहर आ रहा है तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। उल्टी होने पर खाली पेट नहीं रहना चाहिए। खाली पेट रहती हैं तो इससे बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा। थोड़ा-थोड़ा खाते रहना चाहिए।
महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए किस तरह की जांच करवानी चाहिए ?
साल में एक बार कुछ जांचें करवानी चाहिए जिसमें प्रजनन अंग, हृदय, लिवर और खून की जांचें मुख्य हैं। इसके साथ ही कैंसर आदि गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए कुछ टीके भी लगवा सकती हैं। इनके बारे में डॉक्टर से पूछ लें।
शिशु के जन्म के बाद माहवारी होने पर शारीरिक स्वच्छता के लिए आयुर्वेद में क्या उपाय हैं ?
आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद महवारी शुरू होने पर शारीरिक स्वच्छता के लिए दशमूलारिष्ठ, अशोकारिष्ठ को पानी के साथ और सुपारीपाक को दूध के साथ नियमित रूप से लेना ठीक रहता है। डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओडी) होने पर महिलाओं को खानपान में क्या परहेज करने चाहिए। साथ ही दिनचर्या कैसी होनी चाहिए?
पीसीओडी स्वच्छता की कमी, थायरॉइड, मोटापा और प्रदूषण की वजह से होने वाली बीमारी है। इसमेंं महिलाओं को सफेद चीजें जैसे मावा, मिश्री, चीज़, मैदा, चीनी आदि खाने से परहेज करना चाहिए। घी और तेल कम मात्रा में लें। नियमित व्यायाम और योग करने से भी इस बीमारी में आराम मिलता है। सॉफ्टड्रिंक्स, कॉफी न लें।
आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद महिला को खानपान में क्या लेना चाहिए ?
आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद महिलाओं को आहार पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इसमें देसी घी अधिक लें ताकि शरीर को मजबूती मिले। इसके साथ ही सूखे मेवे, गुड़, मूंग का हलवा और दूध से बनी चीजें ज्याद लें।
बच्चे को पौष्टिक दूध पिलाने के लिए मां क्या करे?
घर पर भी दूध को अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है। दूध में शतावरी पाउडर और अश्वगंधा मिला सकते हैं। इससे आयरन, मिनरल, कैल्शियम और विटामिन्स मिलेगा। दूध में केला, नारियल, केसर या हल्दी मिलाकर भी दे सकते हैं। इससे भी बच्चों को मजबूती मिलती है।
डिलीवरी के बाद बढ़े हुए पेट को कैसे कम किया जा सकता हैं ?
डिलीवरी के बढ़े हुए पेट को केवल एक्सरसाइज से कम किया जा सकता है। डिलीवरी के 3माह बाद से महिलाएं पैर उठाने और आगे झुकने वाले कुछ व्यायाम कर सकती हैं। इन एक्सरसाइज को तीन महीने तक जरूर करें। इसके बाद ही पेट कम होगा। इसके साथ ही फैटी और शुगर वाले फूड कम ही लें।
बढ़ती उम्र में ब्रेस्ट कैंसर और बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से कैसे बच सकते हैं?
महिलाओं को सबसे पहले खुद ही जांच करते रहना चाहिए। नहाते समय देखें कि कहीं ब्रेस्ट के आकार में कोई परिवर्तन तो नहीं हो रहा है। अगर ऐसा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। दिनचर्या सही रखें। कोई नशा न करें। महिलाओं को टीकाकरण भी करवाना चाहिए। टीकाकरण 9 से 45 वर्ष की उम्र तक करवा सकती हैं।
पीरियड्स से पहले हार्मोनल परिवर्तन होने पर लड़कियों को क्या करना चाहिए ?
माहवारी शुरू होने के दौरान लड़की और मां में बातचीत होती रहनी चाहिए। साथ ही लड़की को डॉक्टरी सलाह पर ब्राह्मी और घृत दे सकते हैं। महवारी के कारण तनाव और चिड़चिड़ापन होता है। इससे बचने के लिए पंचकर्म में शिरोधारा करा सकते हैं। मन को शांति मिलती है। फास्ट और जंक फूड न खाएं।
मां की थाली में क्या-क्या होना चाहिए, खानपान में किन बातों का ध्यान रखें?
संतुलित आहार लें। इसमेंं प्रोटीन, आयरन, विटामिन सी, ई, डी, बी-12 और बी कॉम्पलेक्सयुक्तडाइट जरूर हो। वैसे तो वसा और कार्बोहाइड्रेट्स हर आहार में मिलता हैं। लेकिन महिलाओं को प्रोटीन डाइट अधिक लेनी चाहिए। इसमें दूध, दही, छाछ, अखरोट, बादाम, मखाना, किशमिश और रोजाना एक चम्मच घी या तेल, चुकंदर, आंवला, हरी सब्जियां, भूने चने के साथ गुड़ आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।