
Prevent liver problems: लिवर, पेट में दायीं ओर होता है। इसका वजन शरीर का लगभग दो फीसदी या औसतन 1500 ग्राम तक होता है। साइज 14-16 सेंटीमीटर तक होती है, लेकिन चर्बी के कारण इसका आकार बढ़ भी सकता है। इसे फैटी लिवर कहते हैं। अत: फैट नियंत्रित रखें। अगर बीएमएसआइ 30 से अधिक है, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित नहीं है तो भी लिवर पर फैट जमा होता है।
संभावित कारण
लिवर रोगों का सबसे प्रमुख कारण अल्कोहल है। अल्कोहल से होने वाले सिरोसिस से 20 साल तक आयु कम हो सकती है। अधिक मीठा खाना, कुछ दवाइयां जैसे टीबी, एंटी-बायोटिक्स, स्टेरॉइड्स अधिक लेने से लिवर रोगों की आशंका कई गुना बढ़ती है। हृदय व फेफड़ों के रोगियों में भी यह आशंका रहती है।
प्रमुख लक्षण
कई बार इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, बल्कि किसी अन्य बीमारी की जांच के दौरान इसका पता चलता है। इसके लक्षणों में भूख न लगना, पेट में पानी भरना, पेट में दायीं तरफ दर्द होना, यूरिन पीला आना, आंख व त्वचा का रंग पीला होना, पैरों में सूजन, उल्टी और थकान आदि की समस्या रहती है।
कैसे हो पहचान
भूख न लगने पर ब्लड टेस्ट (सीबीसी) करवाते हैं। इसमें प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर बीमारी की आशंका रहती है। लिवर का साइज पता करने के लिए अल्ट्रासाउंड और इसमें कैंसर की जांच के लिए सीटी स्कैन किया जाता है। नई जांच फाइब्रो स्कैन से भी लिवर में फैट का पता किया जा सकता है।
इलाज व सावधानी
वजन ज्यादा है तो डाइट और व्यायाम से 25 बीएमआई रखें। अल्कोहल से दूरी बनाएं। बिना डॉक्टरी सलाह दवाइयां न लें। ज्यादा मीठा व ऑयली फूड न खाएं। लिवर की बीमारी है तो टोंड मिल्क पीएं। जंक व पैक्ड फूड, सोडा ड्रिंक्स से दूरी बनाएं। हेपेटाइटिस हो तो तत्काल इलाज लें। हेपेटाइटिस ए, बी व ई के टीके लगवाएं। शुरुआत में बचाव सबसे उपयोगी है। बीमारी बढऩे पर दवाइयों से इलाज होता है। गंभीर स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट भी करना पड़ सकता है।