डूंगरपुर

डूंगरपुर में मूसलाधार बारिश : जिले के 4 बांध छलके, मोरन नदी उफान पर, सड़क बह गई

वागड़ में बारिश ने सूखे पड़े जलस्रोतों में नई जान डाल दी है। लोडेश्वर, भई और लक्ष्मण सागर बांध छलकने के साथ मोरन नदी उफान पर है। दूसरी ओर पुलों और सड़कों पर पानी आने से कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। बेणेश्वरधाम टापू में तब्दील हो गया है।
3 min read
Sep 18, 2026
dungarpur heavy rain
Dungarpur Heavy Rain: ओबरी तहसील के वरदा गांव के पुराने पुल पर बहता पानी (फोटो-पत्रिका)

डूंगरपुर। वागड़ अंचल में गुरुवार रात से शुरू हुआ झमाझम बारिश का दौर शुक्रवार को भी जारी रहा। डूंगरपुर जिले के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश के बाद बांध और जलाशय छलक उठे। ओबरी क्षेत्र में करीब तीन इंच बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद लोडेश्वर बांध ओवरफ्लो हो गया और मोरन नदी पूरे वेग से बहने लगी। वहीं टामटिया का भई बांध और मांडव का लक्ष्मण सागर बांध भी छलक गए। नदियों और पुलों पर पानी आने से कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है।

ओबरी तहसील कार्यालय के अनुसार गुरुवार शाम से शुक्रवार सुबह तक 74 मिमी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण क्षेत्र के छोटे-बड़े जलाशयों में तेजी से पानी की आवक हुई। ओबरी तहसील का सबसे बड़ा लोडेश्वर बांध लबालब होकर छलक गया। बांध के ओवरफ्लो होने के बाद पाड़लिया गांव की पुरानी रपट पर करीब 10 फीट से अधिक पानी बहने लगा। आंतरी के मारगिया डेम पर भी पानी की चादर चलने से मोरन नदी उफान पर आ गई।

पाड़लिया गांव के पुराने रपट से बहता पानी।

वरदा पुल पर डामर बहा, पटली मार्ग बंद

मोरन नदी में तेज बहाव के चलते वरदा गांव का पुराना पुल पानी में डूब गया। पानी के तेज बहाव से पुल की सड़क पर बिछा डामर उखड़कर बह गया, जिससे मुख्य मार्ग पर आवागमन बाधित हो गया। वहीं ओबरी-पटली मार्ग पर चार फीट से अधिक पानी बहने के कारण यातायात पूरी तरह बंद हो गया। नदी-नालों में पानी बढ़ने और सड़कों को नुकसान पहुंचने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

लोडेश्वर बांध के छलकने से क्षेत्र में जल संकट को लेकर राहत की स्थिति बनी है। मोरन नदी पर विराट गांव के पास वर्ष 1958 में निर्मित यह बांध किसानों और ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। इसकी कुल भराव क्षमता 522 एमसीएफटी है। इसमें 455 एमसीएफटी लाइव और 67 एमसीएफटी डेड स्टोरेज है। बांध से निकलने वाली दो मुख्य नहरों के जरिए करीब 1619 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई होती है। साथ ही सागवाड़ा क्षेत्र की पेयजल जरूरतों के लिए भी बांध में पानी आरक्षित रखा जाता है।

वरदा गांव के पुराने पुल पर पानी उतरने के बाद उखड़ा डामार दिखाते ग्रामीण।

भई बांध पर 20 सेंटीमीटर की चादर

सागवाड़ा क्षेत्र में भी बारिश ने जलाशयों को भर दिया। शुक्रवार सुबह करीब 9.20 बजे टामटिया का भई बांध छलक गया। शुरुआत में पानी की हल्की चादर चली, लेकिन कुछ ही देर में इसका बहाव बढ़ गया और करीब 20 सेंटीमीटर की चादर चलने लगी। बांध के छलकने की सूचना के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए।

मांडव का लक्ष्मण सागर बांध भी छलक गया। वहां से निकली जलराशि टामटिया के भई बांध में पहुंची और फिर बरबोदनिया होते हुए लोडेश्वर बांध की ओर गई। इससे सागवाड़ा शहर समेत आसपास के करीब 18 गांवों की पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंतित लोगों को राहत मिली।

बेणेश्वरधाम टापू में तब्दील।

डूंगरपुर में आठ इंच तक बारिश, बेणेश्वर फिर टापू

डूंगरपुर जिले में बारिश का असर व्यापक रहा। पिछले 24 घंटे में आसपुर में 200 मिमी यानी करीब आठ इंच, गणेशपुर में 122 मिमी यानी करीब पांच इंच और डूंगरपुर में 111 मिमी यानी साढ़े चार इंच बारिश दर्ज हुई। बारिश के बाद कई जलाशय और एनीकट ओवरफ्लो हो गए। शहर का प्रमुख डीमिया जलस्रोत भी छलक गया, जबकि घाटी, खुमानसागर, दो नदी, साबला और सुरपुर एनीकट में भी पानी की आवक बढ़ी।

सुरपुर एनिकट ओवरफ्लो। 

बेणेश्वर धाम में करीब 100 लोग फंसे

भारी बारिश के चलते बेणेश्वरधाम इस मानसून में दूसरी बार टापू में तब्दील हो गया। साबला-बेणेश्वर पुल पर करीब चार फीट, बेणेश्वर-गनोड़ा पुल पर छह फीट और बेणेश्वर-वलाई पुल पर आठ फीट पानी की चादर चल रही है। धाम में स्थानीय दुकानदारों और दर्शन के लिए पहुंचे 100 से अधिक लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है।

बारिश से जहां आमजन को गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं किसानों को भी फायदा हुआ है। मक्का और धान की फसलों को पानी मिलने से किसानों की चिंता कम हुई है। हालांकि कुछ किसानों का कहना है कि बारिश देर से होने के कारण खरीफ फसलों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। अब किसानों की नजर आगामी रबी सीजन पर है।