डूंगरपुर

Rajasthan Monsoon: 10 साल में पहली बार जुलाई में सबसे कम बरसात, जानिए एक्सपर्ट ने इसका क्या कारण बताया

Rajasthan Monsoon Update: अल नीनो-ला नीना के चक्र से बदल रहा मानसून का मिजाज पिछले 10 वर्षों के दौरान यह चौथी बार है, जब जुलाई माह में 250 एमएम से कम बारिश दर्ज हुई है।
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Rajasthan Monsoon Weather - File PIC

Dungarpur Rain News: राजस्थान में जुलाई माह में कम हुई बारिश ने एक बार फिर मानसून के बदलते स्वरूप को सामने ला दिया है। कभी झमाझम बारिश से बांध और जलाशय लबालब हो जाते हैं, तो कभी बादलों की बेरुखी से खेतों में नमी तक कम पड़ जाती है। इस बार 1 से 31 जुलाई तक प्रदेश के डूंगरपुर जिले जिले में औसतन 188 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले साल जुलाई में 409 एमएम बारिश हुई थी, यानी इस बार 221 एमएम कम वर्षा हुई। पिछले दस वर्षों के आंकड़ों के अनुसार जुलाई माह में पहली बार बारिश 188 एमएम दर्ज हुई है। पांच वर्षों में औसत 300 एमएम से अधिक और दो वर्षों में 250 एमएम से अधिक बारिश दर्ज की गई।

वर्ष 2017 में जुलाई में सर्वाधिक 488 एमएम बारिश का रिकॉर्ड बना था, जो अब तक कायम है। वहीं 2020 में सबसे कम 218 एमएम और 2021 में 221 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।

बारिश के आंकड़े बताते हैं कि जिले में मानसून का पैटर्न लगातार बदल रहा है। बारिश अब नियमित रहने के बजाय उतार-चढ़ाव वाली हो गई है। इसका असर खरीफ फसलों, जलाशयों, भूजल स्तर और पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है।

डूंगरपुर जिले में जलाशयों की स्थिति



बांधक्षमता (मीटर)वर्तमान स्तर (मीटर)
सोमकमला13.0010.50
लोडेश्वर8.936.50
वात्रक4.721.00
भादर5.351.90
आकरसोल का नाका9.003.30
मारगीया8.855.50
मेवाड़ा7.803.30
अमरपुरा6.804.30
बाबा की बार5.400.60
सूरी तालाब5.490.50
गडा झुमजी3.50BSL
टामटिया3.200.60
पुंजपुर3.822.70
बोडीगामा4.503.05
काठडी8.506.00
गलियाना4.602.90
गजपुर9.752.30
भै का नाका10.070.55
घोडियों का नाका8.501.90
करावाड़ा तालाब2.440.70
वरदोल का नाका6.000.60
वारदा4.401.90


जलाशयों की अभी तक स्थिति

  1. जिले के सबसे बडे बांध सोमकमला बांध में अभी 50 से 75 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
  2. जिले में कुल 21 छोटे बांध में से 6 के पास 50 से 75 प्रतिशत पानी है। वही 14 बांध में पानी 50 प्रतिशत से नीचे है। इसके अलावा एक बांध अभी भी सूखा है।

Rain In Rajasthan: एक्सपर्ट व्यू

अल नीनो-ला नीना के चक्र से बदल रहा मानसून का मिजाज पिछले 10 वर्षों के दौरान यह चौथी बार है, जब जुलाई माह में 250 एमएम से कम बारिश दर्ज हुई है। मानसून की इस अनिश्चितता के पीछे वैश्विक मौसमी प्रणालियों, विशेषकर अल नीनो और ला नीना का बड़ा प्रभाव माना जाता है। सामान्यत: अल नीनो सक्रिय होने पर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे राजस्थान सहित उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत ला नीना के दौरान मानसून अपेक्षाकृत मजबूत रहता है। हालांकि, इन प्रणालियों का प्रभाव हर वर्ष एक जैसा नहीं होता, लेकिन इनका असर अक्सर दो से तीन वर्षों तक मानसून के पैटर्न पर दिखाई देता है। यही कारण है कि कुछ वर्षों में लगातार अच्छी बारिश होती है, जबकि कुछ वर्षों में बारिश सामान्य से कम रहती है।

  • राधेश्याम शर्मा, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक, मौसम केंद्र जयपुर
Updated on:
03 Aug 2026 12:19 pm
Published on:
03 Aug 2026 12:19 pm