Dungarpur News : डूंगरपुर. पेपर लीक, डमी केंडिडेंट और फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी हथियाने के मामले की शुरू हुई जांच अन्य शहरों से होती हुई अब डूंगरपुर तक पहुंच गई है। पिछले चार दिन से बेसिक कम्प्युटर अनुदेशक ग्रेड थर्ड, पुस्तकालय ग्रेड थर्ड, प्रयोगशाला सहायक ग्रेड थर्ड, शारीरिक अनुदेशक एवं कनिष्ठ सहायक भर्ती के […]
Dungarpur News : डूंगरपुर. पेपर लीक, डमी केंडिडेंट और फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी हथियाने के मामले की शुरू हुई जांच अन्य शहरों से होती हुई अब डूंगरपुर तक पहुंच गई है। पिछले चार दिन से बेसिक कम्प्युटर अनुदेशक ग्रेड थर्ड, पुस्तकालय ग्रेड थर्ड, प्रयोगशाला सहायक ग्रेड थर्ड, शारीरिक अनुदेशक एवं कनिष्ठ सहायक भर्ती के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के साथ ही अब पांच साल के दरम्यान प्रारम्भिक शिक्षा महकमे के अंतर्गत हुई शिक्षक भर्ती के दस्तावेजों की जांच का भी फरमान आ गया है। पर, गौर करने वाली बात ये है कि इस पूरी जांच का जिम्मा महकमे ने उन्हीं अधिकारियों को थमा दिया है, जिन्होंने नियुक्ति के समय अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की थी। ऐसे में जांच की सांच पर ही सवाल सहज खड़े हो रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अब तक हुई 195 कार्मिकों की जांच में से एक भी कार्मिक के दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी नहीं नजर आई है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति का खेल
प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नियुक्ति संबंधित फाइल बना रखी है। इसमें हर भर्ती में उन्हीं अधिकारियों को बुलाया जाता है। इसमें दस्तावेज सत्यापन के लिए अलग टीम है, तो पदस्थापन परामर्श शिविर के लिए अलग टीम है। गत पांच वर्ष में हुई विभिन्न भर्तियों में वहीं टीम नियुक्ति संबंधित विभागीय कार्रवाई पूर्ण करती है। हाल ही में पांच साल के दरम्यान हुई भर्तियों के दस्तावेजों की जांच के लिए बनाई गई टीम में भी अधिकांश कार्मिक एवं अधिकारी वहीं हैं। विभाग के ही जानकारों का कहना है कि यदि संदिग्ध अभ्यर्थी या दस्तावेजों में छेड़छाड़ आदि होती, तो वहीं अधिकारी पहले ही पकड़ लेते। अब वापस उन्हीं को बुलाकर जांच करवा कर शिक्षा महकमा महज खानापूर्ति कर रहा है।
खाली सीटों पर प्रवेश
पत्रिका पड़ताल में सामने आया है कि जिले में गत पांच वर्ष या इससे पूर्व में हुई भर्तियों में अधिकांश अभ्यर्थियों की डिग्रियां बाहरी राज्यों की हैं। बाहरी राज्यों की डिग्रियों में ही असल खेल होता है। यह डिग्रियां नियमित स्टूडेण्ट्स की होती हैं। लेकिन, अधिकांश अभ्यर्थी एजेंटों के मकडज़ाल में फंस कर उनको मुंह मांगे दाम देकर घर बैठे ही प्राप्त कर लेते हैं। बाहरी राज्यों में एसटीसी, बीएड, पीटीआई आदि पाठ्यक्रमों में खाली सीटों पर प्रदेश के अभ्यर्थियों को प्रवेश दे दिया जाता है। कई बार एजेंट फिंगर एवं परीक्षा दिलवाने उनके स्तर पर ले जाते हैं और यह परीक्षा भी महज औपचारिक होती है। पहले ही पर्चा आदि उपलब्ध करवा लिया जाता है और अभ्यर्थी को प्रतिशत तक बता दिए जाते हैं। जितने अधिक प्रतिशत उनके अधिक रुपए वसूले जाते हैं। इस मकड़ जाल में हर साल हजारों फंस रहे हैं।
ऐसा है, तो पूरी टीम बदल देंगे
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हैं, तो पूरी टीम बदल देंगे। हालांकि, फिलहाल दस्तख्त मिलान, मूल दस्तावेज, अभ्यर्थी की पहचान, प्रवेश पत्र आदि की ही जांच हो रही है। फिर भी दिखवाता हूं। रणलाल डामोर, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी
एजेंट हैं अधिकारियों के चहेते
पड़ताल में सामने आया कि कई एजेंटों ने अपने कार्यालय तक खोल रखे हैं और ठप्पे से हर साल 700-800 अभ्यर्थियों को यह बाहरी राज्यों से डिग्रियां दिला रहे हैं। यह एजेंट शिक्षा महकमे के आला अफसरों, कर्मचारियों, पुलिस महकमे के अधिकारियों, राजनेताओं के इर्द-गिर्द घुमते हैं और उनके चेहतों को भी घर बैठे ही डिग्रियां उपलब्ध करवाते हैं। यह एजेंट डिग्रियों के सत्यापन की भी गारंटी लेते हैं।
एजेंट लेते हैं सत्यापन की गारंटी
सूत्र बताते है कि नियुक्ति के समय डिग्रियों के सत्यापन के लिए विभाग के पास बाहरी राज्यों उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा आदि राज्यों तक जाने-आने का बजट होता नहीं है। ऐसे में एजेंट अधिकारियों से साठगांठ कर विभाग के एकाध कार्मिक को साथ लेकर अपने वाहन से डिग्रियां सत्यापन करने ले जाते हैं। यह राशि अभ्यर्थियों से वसूली जाती है। उन राज्यों में कार्मिक को महंगी होटलों में ठहराकर घुमने भेज देते हैं और एजेंट यूनिवर्सिटी के दलालों के जरीये डिग्रियों के सत्यापन का कागज निकलवा लेते हैं। इसी कागज के आधार पर कार्मिकों की नियुक्ति की राह आसान हो जाती है। जिले में ऐसेे एक दो नहीं कई एजेंट हैं और इनका मकडज़ाल पूरे जिले सहित पूरे संभाग भर में फैला हुआ है और जमकर चांदी कूट रहे हैं।