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Body Donation : मौत के बाद भी ‘जिंदा रहेगी’ डूंगरपुर की लवली, देहदान कर पेश की एक अनूठी मिसाल

Body Donation : डूंगरपुर शहर की लवली मित्तल मृत्यु के बाद भी 'जिंदा रहेगी। लवली मित्तल ने देहदान कर सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है।

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Dungarpur Lovely Mittal after death will live on setting a unique example by donating her body

डूंगरपुर शहर की लवली मित्तल। फोटो पत्रिका

Body Donation : डूंगरपुर शहर के न्यू कॉलोनी निवासी लवली मित्तल ने मृत्यु के पश्चात देहदान कर सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है। मध्यप्रदेश के उज्जैन में उपचार के दौरान लवली के निधन के बाद परिजनों ने उनकी देह का दान किया, जिसे मध्यप्रदेश सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ संपन्न कराया।

3 साल की उम्र से बीमारी से जूझ रही थीं

लवली के भाई गोपाल मित्तल ने बताया कि उनकी बहन चंचल उर्फ लवली (पुत्री स्व. ओमप्रकाश मित्तल को मात्र तीन वर्ष की आयु में सीपी पोलिया हो गया था। काफी उपचार के बावजूद वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाईं। बढ़ती उम्र के साथ व्यवहार में आए बदलावों के कारण परिजनों ने उन्हें उज्जैन के अंबोदिया स्थित 'अंकित ग्राम सेवा धाम आश्रम' में रखा था। 46 वर्षीय लवली शुरू में घर आने की जिद करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने आश्रम को ही अपना परिवार बना लिया।

निधन के बाद ट्रस्टी की प्रेरणा से लिया फैसला

8 जनवरी 2026 को लवली की अचानक तबीयत बिगड़ने की सूचना पर परिजन आश्रम पहुंचे, जहां 9 जनवरी को लवली ने अंतिम सांस ली। इस दुखद घड़ी में आश्रम के ट्रस्टी सुधीर गोयल ने परिजनों को ढांढस बंधाया और लवली की स्मृतियों को जीवित रखने के लिए देहदान का सुझाव दिया। शुरुआत में हिचकिचाहट के बाद, मानवता के इस बड़े कार्य के लिए परिजन मान गए।

राजकीय सम्मान के साथ देहदान

मध्यप्रदेश सरकार की देहदान नीति के तहत 10 जनवरी को आश्रम परिसर में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में राजकीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। लवली के पार्थिव देह को पुलिसकर्मियों ने गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) देकर सम्मानित किया। इसके पश्चात चिकित्सकों की टीम सम्मानपूर्वक देह को मेडिकल कॉलेज ले गई।

नेत्र, त्वचा और चिकित्सा शिक्षा में योगदान

गोपाल मित्तल ने बताया कि लवली की आंखों और चर्म का दान जरूरतमंदों के लिए किया जाएगा। वहीं, उनकी देह मेडिकल कॉलेज के करीब 300 से 400 छात्र-छात्राओं के शोध और चिकित्सा शिक्षा के काम आएगी। परिजनों ने बताया कि लवलीन आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन इस दान के जरिए वह दुनिया में हमेशा जीवित रहेगी।

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