नियमितीकरण के लिए तीन दिन तक प्रदर्शन के बाद गुरुवार को पांच जिले के सरकारी कार्यालय के दो हजार से ज्यादा अनियमित कर्मचारी संभाग मुख्यालय में जुटे।
दुर्ग. नियमितीकरण के लिए तीन दिन तक जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन के बाद गुरुवार को पांच जिले के सरकारी कार्यालय के दो हजार से ज्यादा अनियमित कर्मचारी संभाग मुख्यालय में जुटे। इससे मानस भवन के सामने धरना स्थल छोटा पड़ गया। जगह के अभाव में कर्मचारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इससे चौपाटी वाली रोड जाम हो गया। हालांकि बाद में पुलिस ने सड़क के दोनों ओर स्टापर लगाकर आवाजाही प्रतिबंधित कर दिया।
कर्मचारी महासंघ के बैनरतले पिछले 3 दिन से अनिश्चिकालीन हड़ताल
छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ के बैनरतले कर्मचारियों ने मानस भवन सामने पिछले 3 दिन से अनिश्चिकालीन हड़ताल कर रहे हैं। पहले चरण में जिले के कर्मचारी धरना प्रदर्शन पर बैठ रहे थे। इस बीच सरकार की ओर से पहल नहीं किए जाने पर कर्मचारियों ने गुरुवार को संभाग स्तरीय प्रदर्शन शुरू किया। इसमें दुर्ग के अलावा बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव व कवर्धा के अनियमित कर्मचारी भी शामिल हुए। धरना प्रदर्शन को संभाग अध्यक्ष मनोज मरकाम, दुर्ग अध्यक्ष राखी शर्मा, बालोद अध्यक्ष संतोषसाहू, बेमेतरा अध्यक्ष नरेशसाहू, कवर्धाअध्यक्ष संजय कठाले, राजनांदगांव अध्यक्ष सुरेश यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
शुक्रवार को निकालेंगे रैली
संभागीय अध्यक्ष मनोज मरकाम ने बताया कि 20 जुलाई को भी संभाग स्तरीय प्रदर्शन जारी रहेगा। शुक्रवार को प्रदर्शन के बाद रैली भी निकाली जाएगी। इसमें संभाग के कर्मचारी शामिल होंगे। रैली धरना स्थल से नगर चौपाटी होकर महात्मा गांधी प्रतिमा स्थल, सरदार पटेल चौक से वापस नया बस स्टैंड होकर धरना स्थल पर समाप्त होगी।
नहीं तो राजधानी में धरना
संभाग अध्यक्ष ने बताया कि 20 जुलाई तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर 21 जुलाई को रायपुर में प्रदेश स्तरीय धरना शुरू किया जाएगा। 22 जुलाई तक धरना के बाद 23 को राजधानी में मौन रैली निकाली जाएगी। इसके बाद भी मांग पूरी नहीं हुई गई तो 25 जुलाई से बेमियादी भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
कर्मचारियों की यह मांग
0 सभी अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण।
0 प्रशासकीय स्वीकृति और बजट के नाम पर सेवावृद्धि व पृथक किए जाने की व्यवस्था पर रोक, 62 की आयु तक सेवा सुरक्षा।
0 छटनी किए गए अनियमित कर्मचारियों की बहाली।
0 आउट सोर्सिंग व ठेका प्रथा पूर्णत: समाप्त।
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