पर की आशा-सदा निराशा यानि दूसरों पर आश्रित रहने की आदत व्यक्ति के जीवन में आशा की दीप प्रकट नहीं होने देता। अगर व्यक्ति दृढ़ संकल्प कर ले और यत्न करे तो घोर निराशा के बीच भी प्रकाशपुंज प्रदीप्त हो जाता है।
दुर्ग. पर की आशा-सदा निराशा यानि दूसरों पर आश्रित रहने की आदत व्यक्ति के जीवन में आशा की दीप प्रकट नहीं होने देता। अगर व्यक्ति दृढ़ संकल्प कर ले और यत्न करे तो घोर निराशा के बीच भी प्रकाशपुंज प्रदीप्त हो जाता है। दूसरों पर निर्भर ना होकर स्वयं प्रकाशित हो और दूसरों को प्रकाशवान बनाने का प्रयत्न करें।
श्री उवसग्गहरं पाश्र्व तीर्थ नगपुरा में चातुर्मास प्रवचन
उक्त बातें साध्वी लब्धयशाश्री ने श्री उवसग्गहरं पाश्र्व तीर्थ नगपुरा में चातुर्मास रविवारीय विशिष्ट अनुष्ठान के तहत प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि अमावस्या की घोर अंधेरी रात में एक दीप से दूसरा और दूसरे से तीसरा दीप जलने का क्रम चलता है, परिणाम स्वरूप अमावस्या की रात में असंख्य दीपों की श्रृंखला अंधकार को दूर भगाकर उस रात को दीपावली में परिवर्तित कर देता है। उन्होंने कहा कि अहंकार विवेक का नाश करता है। जब-जब हम परमात्मा के द्वार पर अपने अहंकार को साथ लेकर जाते हैं, तब-तब हमें परमात्मा के दरवाजे बंद मिलते हैं। परमात्मा से मिलन श्रद्धा व समर्पण के बल पर होता है, अहंकार के बल पर नहीं।
अहंकारी मनुष्य विनम्रता की भाषा नहीं जानता
अहंकारी मनुष्य विनम्रता की भाषा नहीं जानता। अहंकार जीवन को कठोर बनाता है। अहंकारी व्यक्ति की मन:स्थिति उस बड़ी इमारत पर बैठे बंदर जैसी होती है जो इमारत की उंचाई को अपनी उंचाई समझता है। अहंकार आदमी-आदमी के बीच में भेद की रेखा खींचकर उसे विभक्त कर देता है। अहंकार को छोड़ हमें धर्म की शरण स्वीकार करना चाहिए।
चातुर्मास आराधकों की ओर से 108 पाश्र्वनाथ महापूजन की संरचना
प्रवचन सभा में नागपुर, यवतमाल, आर्वी, दारव्हा के चातुर्मास आराधकों की ओर से 108 पाश्र्वनाथ महापूजन की संरचना की गई। रायपुर के सिद्धितप आराधक मीनाबेन उत्तमभाई मैशेरी का तीर्थ प्रबंधन की ओर से ट्रस्टी पुखराज मुणोत, सुरेश बागमार, मोहन चोपड़ा ने स्वागत किया। वहीं 81 पूनम यात्रियों ने परमात्मा का वर्धमान शक्रस्तव मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया।