
दो वर्षीय कोर्स में 80 क्रेडिट (photo source- Patrika)
MA Chhattisgarhi Course: छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति को अकादमिक स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। Hemchand Yadav University में इस शैक्षणिक सत्र से एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है। अब तक यह कोर्स मुख्य रूप से Pandit Ravishankar Shukla University की यूटीडी में संचालित होता था, लेकिन अब दुर्ग विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में भी इसे पढ़ाया जाएगा। इससे क्षेत्रीय भाषा के अध्ययन और शोध को नया विस्तार मिलेगा।
दो वर्षीय एमए छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम को चार सेमेस्टर में विभाजित किया गया है। कुल 1600 अंकों के लिए 80 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक सेमेस्टर में चार प्रश्नपत्र होंगे, जिनमें 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन और 80 अंक थ्योरी के लिए तय किए गए हैं। खास बात यह है कि पूरा सिलेबस छत्तीसगढ़ी भाषा में तैयार किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को भाषा के मूल स्वरूप में अध्ययन का अवसर मिलेगा।
पहले सेमेस्टर में भाषा की पृष्ठभूमि, लोकजीवन, भाषा संरचना और लोक साहित्य पर फोकस किया जाएगा। दूसरे सेमेस्टर में साहित्य का इतिहास, लोकनाट्य, लोककथा-गाथा और लोककाव्य शामिल होंगे। तीसरे सेमेस्टर में भाषा के वैज्ञानिक पक्ष, प्रयोजनमूलक उपयोग, आईटी और अनुवाद जैसे आधुनिक विषयों को जोड़ा गया है। चौथे सेमेस्टर में आधुनिक काव्य, कथा साहित्य, निबंध-एकांकी के साथ लघु शोध प्रबंध को शामिल किया गया है।
इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल भाषा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व दिया गया है। विद्यार्थियों को राज्य की भौगोलिक स्थिति, प्राचीन इतिहास, अंग्रेजी शासन काल और 1857 के विद्रोह में क्षेत्र की भूमिका के बारे में पढ़ाया जाएगा। साथ ही राज्य गठन की प्रक्रिया, प्रमुख नेताओं का योगदान, सामाजिक-आर्थिक परिवेश और सांस्कृतिक धरोहर को भी विस्तार से शामिल किया गया है।
कोर्स के माध्यम से छात्रों को छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार, परंपराएं, पहनावा, लोकाचार और लोकशिल्प की जानकारी दी जाएगी। इससे न केवल उनकी अकादमिक समझ बढ़ेगी, बल्कि वे अपनी जड़ों और परंपराओं से भी जुड़ पाएंगे।
एमए छत्तीसगढ़ी का यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें स्वर-व्यंजन, व्याकरण, शब्दभेद और प्रयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे छात्र न केवल शुद्ध भाषा सीख सकेंगे, बल्कि ग्रामीण अंचलों में बोली जाने वाली ठेठ छत्तीसगढ़ी को समझने और संवाद में उपयोग करने में भी सक्षम होंगे।
इस कोर्स के शुरू होने से छात्रों के लिए उच्च शिक्षा, शोध, अनुवाद, पत्रकारिता और शिक्षण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ी भाषा को अकादमिक और व्यावसायिक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Published on:
19 Apr 2026 04:53 pm
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