
छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष प्रभात मिश्र (Photo Patrika)
रायपुर @ ताबीर हुसैन। छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ी छत्तीसगढ़ी भाषा आज पहचान और सम्मान की लड़ाई लड़ रही है। घर-आंगन और लोकगीतों तक सीमित यह बोली तभी सशक्त जनभाषा बन पाएगी, जब इसे रोजगार, शिक्षा और प्रशासन से जोड़ा जाएगा। जब युवाओं को अपनी ही भाषा में नौकरी और अवसर मिलेंगे, तभी वे गर्व से छत्तीसगढ़ी को अपनाएंगे। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्मसम्मान की पहचान है। छत्तीसगढ़ी को रोजगार से जोड़ने से न सिर्फ यह मजबूत होगी, बल्कि प्रदेश की अन्य बोलियों और लोकभाषाओं को भी नई ऊर्जा और संरक्षण मिलेगा।
पूरी खबर पढ़ने के लिए लॉगिन करें।
बड़ी खबरें
View AllPatrika Special News
ट्रेंडिंग
