घर में कभी एक भगवान की ज्यादा प्रतिमाएं न रखें, इससे दोष लग सकता है सिंघासन पर मूर्तियां स्थापित करते समय दिशा का ध्यान रखें
नई दिल्ली। लोग घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए देवी-देवताओं की मूर्तियां एवं तस्वीरें रखते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में भगवान के कुछ विशेष स्वरूपों की प्रतिमाएं रखना अच्छा होता है। इससे धन की वृद्धि के साथ परिवार के सदस्यों के बीच तालमेल बेहतर रहता है।
1.वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कई तरह के देवी-देवताओं की मूर्ति रखने के बजाय महज पांच भगवानों की मूर्ति रखें। इसे पंचायतन के नाम से जाना जाता है।
2.इसके तहत घर में गणेश, विष्णु, शिव, सूर्य एवं मां दुर्गा की मूर्ति रखनी चाहिए। इससे मूर्ति दोष खत्म होता है।
3.वास्तु एक्सपर्ट निधि खेड़ा के अनुसार पूजा स्थान पर भगवान रखने की दिशा भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पंचायतन की स्थापना करते समय अपने ईष्ट देव का ध्यान रखें।
4.जो लोग गणेश जी को अपना ईष्ट मानते हैं उन्हें सिंघासन के मध्य में गजानन को विराजमान करना चाहिए। जबकि विष्णु जी को ईशान कोण में, शिव जी को आग्नेय कोण में, नैर्ऋत्य कोण में सूर्य एवं वायव्य कोण में देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। इससे घर में खुशहाली आएगी और कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
5.इसी तरह जो लोग गणेश जी के अलावा दूसरे भगवान को अपना ईष्ट मानते हैं उन्हें हमेशा सिंघासन के मध्य में अपने आराध्य की मूर्ति रखनी चाहिए। इससे पूजा का दोगुना लाभ मिलेगा।
6.पूजा स्थान पर कभी भी विषम संख्या में गणेश जी की मूर्ती न रखें जैसे- एक, तीन एवं पांच। ये अशुभ माना जाता है। इससे घर में दरिद्रता आ सकती है।
7.घर में हमेशा छोटा शिवलिंग रखें। ये अंगूठे के आकार से ज्यादा बड़ा न हो। क्योंकि ज्यादा बड़ा शिवलिंग घर में रखने से गृहस्थ लोगों का मन सांसारिक मोह से हट सकता है। इससे वैवाहिक जीवन में हलचल हो सकती है।
8.घर में कभी भी नटराज की मूर्ति न रखें क्योंकि ये शिव जी का विकराल रूप होता है। इसे घर में रखने से नकारात्मकता आती है।
9.घर में कभी भी एक भगवान की कई सारी मूर्तियां न रखें। इससे वास्तु दोष हो सकता है। जिसके चलते पूजन का फल नहीं मिलेगा।
10.घर में कभी भी हनुमान जी के विकराल स्वरूप वाली मूर्ति न रखें। इससे क्रोध बढ़ सकता है। गृहस्थों को श्रीराम और माता सीता के साथ बैठे हुए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।