Dhirendra Shastri vs Pappu Yadav: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के तीखे बयान के बाद बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री एकबार फिर चर्चा में आ गए हैं। जानिए अपने बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कितने पढ़े-लिखे हैं और क्या वे ग्रेजुएट हैं?।
Dhirendra Shastri Education: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयानों को लेकर एक बार फिर देश की सियासत और गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। इस बार बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बेहद तीखी टिप्पणी की है। पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री की तुलना चोर-उच्चकों से करते हुए उनकी विद्वत्ता पर सवाल उठाए हैं। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर एक ही बहस छिड़ी है कि आखिर करोड़ों अनुयायियों वाले बागेश्वर बाबा खुद कितने पढ़े-लिखे हैं?
Dhirendra Shastri Education
हाल ही में धीरेंद्र शास्त्री ने उत्तर प्रदेश के बांदा में जातिवाद के खिलाफ बयान देते हुए हिंदुओं को एकजुट होने की बात कही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद पप्पू यादव ने कहा, कौन है ये धीरेंद्र? आप किसी को भी कथावाचक बना देते हैं। क्या ये ओशो या आचार्य राममूर्ति हैं? पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री को ढोंगी बताते हुए कहा कि देश को कृष्णवादी और बुद्ध के रास्ते पर चलने की जरूरत है, पाखंड की नहीं। उन्होंने वृंदावन के प्रेमानंद बाबा की तारीफ करते हुए धीरेंद्र शास्त्री पर सनातन धर्म को ना जानने का आरोप भी लगाया।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की शुरुआती पढ़ाई उनके अपने गांव गढ़ा (छतरपुर) में हुई, जहां से उन्होंने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की। गांव में आगे की पढ़ाई की सुविधा न होने के कारण उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद की शिक्षा के लिए वे हर रोज 5 किलोमीटर पैदल चलकर पास के गांव गंज जाया करते थे। वहीं से उन्होंने अपनी 12वीं की परीक्षा पास की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के लिए बीए (BA) में दाखिला लिया और प्राइवेट स्टूडेंट के तौर पर अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की।
धीरेंद्र शास्त्री की आध्यात्मिक शिक्षा की नींव उनके दादाजी भगवानदास गर्ग ने रखी थी। धीरेंद्र शास्त्री अपने दादाजी को ही अपना गुरु और रोल मॉडल मानते हैं। भगवानदास गर्ग खुद एक सिद्ध संत थे और निर्मोही अखाड़े से जुड़े हुए थे। वे भी अपनी परंपरा के मुताबिक, दरबार लगाया करते थे। धीरेंद्र शास्त्री ने बचपन में ही अपने दादाजी की छत्रछाया में रामायण और श्रीमद्भागवत गीता का अध्ययन करना शुरू कर दिया था। धीरेंद्र शास्त्री अक्सर अपने प्रवचनों में जिक्र करते हैं कि आज वे जो कुछ भी हैं, वह उनके दादाजी और गुरु की कृपा का ही फल है।
यह पहली बार नहीं है, जब धीरेंद्र शास्त्री अपने दावों या बयानों के चलते चर्चा में हैं। नागपुर में अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के साथ हुए 'चमत्कार' वाले विवाद से लेकर हालिया 'सनातन हिंदू एकता यात्रा' और 'बटोगे तो कटोगे' जैसे नारों के समर्थन तक, वे लगातार सुर्खियों में बने रहते हैं। पप्पू यादव की ताजा टिप्पणी ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। जिसके चलते वे अब एक-बार फिर मानवाधिकार समूहों और तर्कवादियों के निशाने पर आ गए हैं।