संजय ने अपनी कहानी मीडिया के साथ शेयर की है। साल 2012 के दौरान ही संजय को पता चला कि उन्हें लार ग्रंथियों में कैंसर है। ये पता चलते ही उनको झटका लगा था और वो निराश भी हुए थे। फिर, 2012 से 2018 के बीच रायपुर, भिलाई से लेकर मुंबई तक कैंसर का इलाज चला। करीब चार बार उनकी सर्जरी की गई। इसी बीच उनको अपने बचपन के सपने को साकार करना था तो वो कैंसर के दर्द को भूलकर रायपुर आकर तैयारी करने लगे थे।