शिक्षा

स्कूली बच्चों को इस समस्या से जल्द मिलेगा छुटकारा

20 नवंबर को जारी इस सर्कुलर के अनुसार अब प्रत्येक कक्षा और बच्चे की उम्र के हिसाब से बस्ते का वजन निर्धारित होगा।
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Nov 25, 2018
School Bag Weight
School Bag

अब बस्ते के बोझ तले नहीं दब पाएगा बचपन क्योंकि भारत सरकार ने एक प्रपत्र जारी कर कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक के बच्चों के बस्ते का बोझ सीमित कर दिया है। 20 नवंबर को जारी इस सर्कुलर के अनुसार अब प्रत्येक कक्षा और बच्चे की उम्र के हिसाब से बस्ते का वजन निर्धारित होगा। गैर सरकारी संगठन स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग के प्रदेशाध्यक्ष बृजपाल परमार और प्रदेश महासचिव भारत भूषण बंसल ने बताया कि सर्कुलर के अनुसार कक्षा पहली और दूसरी में पढऩे वाले बच्चों के बस्ते का वजन डेढ़ किलोग्राम, तीसरी से कक्षा पांचवीं के बच्चों के बस्ते का वजन 2 से 3 किलोग्राम, छठी से आठवीं तक के बच्चों के बस्ते का वजन चार किलोग्राम, आठवीं से नौंवी तक बस्ते का वजन साढ़े चार किलोग्राम और दसवीं से बारहवीं में पढऩे वाले बच्चों के बस्ते का वजन पांच किलोग्राम से अधिक नहीं होगा।

परमार और बंसल के अनुसार इसके अलावा भारत सरकार व राज्य सरकारों से मान्यता प्राप्त सभी निजी स्कूलों में कक्षा पहली व दूसरी कक्षा के बच्चे को कोई भी होमवर्क नहीं दिया जाएगा। इसके साथ-साथ कक्षा पहली से दूसरी तक भाषा, गणित विषय से संबंधित केवल दो ही किताबें अनिवार्य हैं, जबकि कक्षा तीसरी से पांचवीं तक भाषा, ईवीएस, गणित विषय की केवल एनसीईआरटी पाठयक्रम की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं।

परमार ने बताया कि भारत सरकार ने अपने प्रपत्र में सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को सख्त हिदायतें दी हैं कि कक्षावार बच्चों के बस्ते का वजन निर्धारित से ज्यादा नहीं होना चाहिए। निजी स्कूलों में एनसीईआरटी पाठयक्रम की पुस्तकें लागू किए जाने संबंधी एक मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में होनी है। न्यायालय में दायर की गई याचिका में खासतौर पर निजी स्कूलों के मनमाने ढंग से निजी प्रकाशकों के साथ सांठगांठ कर मोटा मुनाफा कूटने की नियत से बच्चों एवं अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालकर पाठयक्रम की पुस्तकें थोपने की शिकायत की गई है।

Updated on:
25 Nov 2018 08:02 pm
Published on:
25 Nov 2018 08:02 pm