यदि आपके पास शैक्षणिक स्तर पर भी फॉरेन लैंग्वेज कोर्स का सर्टिफिकेट होने के अलावा डिप्लोमा या डिग्री हो तो नौकरी के अवसर कहीं हद तक बढ़ जाते हैं।
आमतौर पर विदेशों में पढ़ाई के अलावा नौकरी करने के लिए व्यक्ति के पास फॉरेन लैंग्वेज की जानकारी होना जरूरी होता है। लेकिन यदि आपके पास शैक्षणिक स्तर पर भी फॉरेन लैंग्वेज कोर्स का सर्टिफिकेट होने के अलावा डिप्लोमा या डिग्री हो तो नौकरी के अवसर कहीं हद तक बढ़ जाते हैं।
कोर्स अवधि
विदेश में जिस भी जगह आप नौकरी या पढ़ाई करने की सोच रहे हैं तो उस जगह की भाषा में 6 माह से एक साल तक का सर्टिफिकेट कोर्स, 1-2 साल का डिप्लोमा कोर्स, तीन वर्षीय डिग्री और दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री होना फायदेमंद हो सकता है। हो सकता है इन एकेडेमिक क्वालिफिकेशन के आधार पर अच्छी नौकरी के साथ वेतनमान भी अच्छा ही मिले।
नौकरी के अवसर
फ्रेंच, जर्मन और खासतौर पर रशियन भाषाओं की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। बतौर फॉरेन लैंग्वेज के शिक्षक के रूप में आप न केेवल देश में बल्कि विदेश में भी काम कर सकते हैं। इसके अलावा इंटरप्रेटर, ट्रांसलेटर के पद पर भी काम कर सकते हैं। आजकल ऑनलाइन भी इन प्रोफेशनल की आवश्यकता होती है। ग्लोबल मार्केट का विस्तार होने से बीपीओ सेक्टर में भी ट्रांसलेटर की डिमांड बढ़ी है। फॉरेन सर्विसेज में भी फॉरेन लैंग्वेज कोर्स का सर्टिफिकेट प्राप्त अभ्यर्थी की जरूरत होती है।